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सुप्रीम कोर्ट ने 1984 सिख विरोधी दंगों से जुड़े 6 मामलों में बरी किए गए आरोपियों के खिलाफ एसएलपी दायर करने को कहा, 51 हत्याओं की फिर से जांच की मांग

सुप्रीम कोर्ट ने 1984 सिख विरोधी दंगों से जुड़े 6 मामलों में बरी किए गए आरोपियों के खिलाफ एसएलपी दायर करने का आदेश दिया है और 51 हत्याओं की फिर से जांच की मांग वाली याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा है. कोर्ट ने 17 मार्च को मामले की अगली सुनवाई तय की है.

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Aarika Singh Edited by Aarika Singh

1984 सिख विरोधी दंगों से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार से कहा कि 6 मामलों में बरी किया गया है. उन मामलों में एसएलपी दायर करें. कोर्ट 17 मार्च को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा. वही कोर्ट ने सिख हिंसा के दौरान हुई हत्या के 51 मामलों को फिर से जांच की मांग वाली याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है.

जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने सिख विरोधी दंगों के दौरान हत्या के 51 मामलों की फिर से जांच की मांग वाली याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है. 56 मामलों में से 5 मामले में चार्जशीट दाखिल हुआ है. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने पूछा था कि क्या बरी किए जाने के विरुद्ध कोई अपील दायर की गई थी? कोर्ट ने कहा था कि अभी तक ट्रायल खत्म हो जाना चाहिए था, कोर्ट एस गुरलाद सिंह काहलों की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा है.

आरोपी दोषी ठहराये जाने के बजाए बरी कर दिया गया

याचिका में दंगा पीड़ितों के लिए जल्द न्याय सुनिश्चित करने की मांग की गई है. पिछली सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि रिकॉर्ड से यह भी साफ है कि 1984 के सिख विरोधी दंगों के कई मामलों में ट्रायल इस तरह से हुआ, जिसके चलते आरोपी दोषी ठहराये जाने के बजाए बरी कर दिए है. एएसजी ऐश्वर्या भाटी ने कोर्ट को बताया था कि आरोपियों को बरी किए जाने के खिलाफ अपील दायर की थी, लेकिन देरी के आधार पर याचिका को खारिज कर दिया गया.

एएसजी ने कहा कि 11 जनवरी 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने 1984 के दंगों से संबंधित 186 मामलों की जांच के लिए दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश एसएन ढींगड़ा की अध्यक्षता में एक एसआईटी का गठन किया था. एसआईटी ने मामलों की जांच के बाद जिन लोगों को बरी किया गया है, उनके खिलाफ अपील दाखिल करने की सिफारिश की है. पिछली सुनवाई में याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील एचएस फुल्का ने एक सारणीबद्ध चार्ट कोर्ट को सौपा था.

इस चार्ट में दिल्ली पुलिस की ओर से निष्क्रियता को उजागर किया गया है. जस्टिस एसएन ढींगरा ने कहा था कि छह लोगों की हत्या की कभी जांच नहीं की गई और कम से कम दो मामलों में कार्रवाई नही की गई. उन्होंने कहा था जिस एसएचओ ने कथित तौर पर सिखों की लाइसेंसी बंदूकें छीन ली और भीड़ को सिखों पर हमला करने का इशारा किया, उसे एसीपी के पद पर पदोन्नति कर दिया गया. पिछले साल 20 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को 1984 के सिख विरोधी दंगों के मामलों में मुकदमों की स्थिति पर रिपोर्ट दाखिल करने को कहा था.

-भारत एक्सप्रेस



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