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भोजशाला किसकी…? ASI की वीडियोग्राफी अहम सबूत, मुस्लिम पक्ष के ऐतराज पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा- हाईकोर्ट जाएं

भोजशाला विवाद में ASI रिपोर्ट और वीडियोग्राफी से साइट की वास्तविक स्थिति साफ होने की उम्मीद है. हिंदू-मुस्लिम दोनों पक्ष अब हाईकोर्ट में अपनी दलीलें पेश करेंगे. सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट पर पूरा भरोसा जताया है.

Bhojshala Dispute Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट ने भोजशाला विवाद पर कहा- वीडियोग्राफी की आपत्तियां हाईकोर्ट ही तय करेगा.

Bhojshala Dhar Controversy: सुप्रीम कोर्ट ने आज भोजशाला-कमाल मौला विवाद पर सुनवाई की. मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि वीडियोग्राफी से जुड़ी सभी आपत्तियों पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ही फैसला करेगा. कोर्ट ने किसी भी पक्ष के हक में कोई राय नहीं दी. सब कुछ हाईकोर्ट के अंतिम सुनवाई पर खुला रहेगा.

हिंदू-मुस्लिम पक्ष की याचिकाएं

मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी की ओर से दायर याचिका पर फैसला देने के बजाए, सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को हाईकोर्ट भेज दिया है. वहीं, वकील विष्णु शंकर जैन ने सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटिशन दाखिल की. इसमें ASI द्वारा की गई वीडियोग्राफी की कॉपी मांगी गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को निस्तारित कर दिया. कोर्ट ने कहा कि वीडियोग्राफी पर कोई भी आपत्ति हाईकोर्ट ही देखेगा. हाईकोर्ट की इंदौर बेंच 2 अप्रैल को इस मामले की सुनवाई करेगी.

ASI के सर्वे का बैकग्राउंड

भोजशाला 11वीं शताब्दी का एएसआई संरक्षित स्मारक है. हिंदू इसे देवी सरस्वती (वाग्देवी) का मंदिर मानते हैं. मुस्लिम समुदाय इसे कमाल मौला मस्जिद कहता है. अप्रैल 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने ASI को वैज्ञानिक सर्वे की अनुमति दी थी. इसमें कहा गया था कि साइट का चरित्र नहीं बदला जाए और कोई भौतिक खुदाई न हो.

ASI ने 98 दिनों में सर्वे पूरा किया और जुलाई 2024 में 2189 पृष्ठों की रिपोर्ट हाईकोर्ट को सौंपी. जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट को रिपोर्ट खोलने और दोनों पक्षों को कॉपी देने का निर्देश दिया. रिपोर्ट में प्राचीन मंदिरों के अवशेषों का जिक्र है.

इतिहासकारों का क्‍या है कहना?

इतिहासकारों के अनुसार, भोजशाला का निर्माण 11वीं शताब्दी में परमार वंश के महान राजा भोज (शासनकाल 1000-1055 ई.) ने करवाया था. राजा भोज विद्या और कला के बड़े संरक्षक थे. उन्होंने अपनी राजधानी धार (मध्य प्रदेश) में 1034 ईस्वी के आसपास एक भव्य शिक्षा केंद्र (पाठशाला) और माता सरस्वती (वाग्देवी) का मंदिर बनवाया, जिसे भोजशाला कहा गया. यह जगह संस्कृत अध्ययन और ज्ञान का प्रमुख केंद्र बनी. सरस्वती पूजा वहीं से शुरू हुई और राजा भोज के समय से ही माता की प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना होती रही. बाद में 14वीं शताब्दी में इसे मस्जिद में बदल दिया गया, लेकिन हिंदू परंपरा में सरस्वती पूजा मंगलवार और वसंत पंचमी पर आज भी जारी है.

हाईकोर्ट के जजों द्वारा निरीक्षण

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने रिपोर्ट पर दोनों पक्षों से आपत्तियां मांगी थीं. हाल ही में हाईकोर्ट के दो जजों ने विवादित स्थल का निरीक्षण भी किया. 2 अप्रैल को अंतिम सुनवाई शुरू होने वाली है. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुसार ही आपत्तियों पर विचार होगा.

अब तक जो हुआ, वे मुख्‍य बिंदु

  • ASI ने 98 दिन सर्वे किया था और 2189 पृष्ठ रिपोर्ट दी.
  • जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने रिपोर्ट जारी का निर्देश दिया.
  • हाईकोर्ट जजों ने 28 मार्च 2026 को स्थल का निरीक्षण किया.
  • ASI की रिपोर्ट में प्राचीन मंदिर अवशेषों के संकेत मिले
  • सुप्रीम कोर्ट ने पहले अलग पूजा-नमाज समय तय किए थे.

Bhojshala and Kamal Maula mosque site Dhar Madhya Pradesh

हिंदू-मुस्लिम दोनों पक्षों की स्थिति

यह विवाद लंबे समय से चल रहा है. हिंदू पक्ष भोजशाला को प्राचीन सरस्वती मंदिर मानता है. मुस्लिम पक्ष इसे मस्जिद बताता है. सुप्रीम कोर्ट ने पहले जनवरी 2026 में दोनों समुदायों के लिए अलग-अलग पूजा-नमाज के समय तय किए थे. अब वीडियोग्राफी और रिपोर्ट पर आपत्तियां हाईकोर्ट में ही तय होंगी. कोर्ट ने कहा, “हमने मेरिट पर कोई राय नहीं दी. मामला हाईकोर्ट में ले जाइए.” जिसके बाद अब सुरक्षा के कड़े इंतजाम के बीच वहां मामले की सुनवाई होगी.

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