यूनियन कार्बाइड के कचरे को लेकर सुप्रीम कोर्ट
यूनियन कार्बाइड का कचरा जलाने को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर याचिका का सुप्रीम कोर्ट ने निपटारा कर दिया है. कोर्ट ने याचिकाकर्ता को हाई कोर्ट जाने को कहा है. जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस एजी मसीह की पीठ ने यह आदेश दिया है. इंदौर के रहने वाले चिन्मय मिश्रा ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. पीथमपुर में कचरे के निपटारे के आदेश के खिलाफ यह याचिका दायर की गई थी. याचिका में रासायनिक कचरे से पीथमपुर के आस पास के गांवों के लोगों के स्वास्थ्य के बारे में चिंता जताई थी.
हाई कोर्ट ने दिया था ये आदेश
दायर याचिका में कहा गया था कि यूनियन कार्बाइड के कचरे को भोपाल से पीथमपुर ले जाने का फैसला लेते समय पीथमपुर के लोगों से सलाह नही ली गई. कुल 12 सीलबंद कंटेनरों में पैक किए कचरे को 2 जनवरी को भोपाल से धार जिले के पीथमपुर ले जाया गया. मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने 3 दिसंबर 2024 को आदेश दिया था कि इस रासायनिक कचरे को वैज्ञानिक विधि से नष्ट किया जाए.
मध्य प्रदेश सरकार ने यूनियन कार्बाइड से पीथमपुर पहुचाया कचरा
मध्य प्रदेश सरकार ने 1 जनवरी को यूनियन कार्बाइड से सुरक्षा के बीच कंटेनरों से कचरा पीथमपुर पहुचाया. इसके बाद इसको लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है. भारी विरोध को देखते हुए आसपास के इलाकों में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था. इसके अलावा संयंत्र के पास स्थित तारपुरा गांव के लोगों को चिन्हित कर उनके घरों में नजरबंद कर दिया गया है. इतना ही नहीं सरकार के इस कदम को रोकने के लिए लोगों ने आत्मदाह करने तक की कोशिश भी की थी.
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कचरे के जलने से बढ़ सकता है रेडिएशन का खतरा
इस कचरे के जलने से लोगों को रेडिएशन का खतरा हो सकता है, और अगर ऐसा हुआ तो वहां की चिकित्सा सुविधा भी पर्याप्त नहीं है. वही विरोध प्रदर्शन को देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार को कहना पड़ा कि मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के सामने स्थिति पेश करेंगे. तब तक कचरा जलाने की कार्रवाई शुरू नही होगी. इस बीच पीथमपुर बचाओ समिति के अध्यक्ष डॉक्टर हेमंत हिरोले के नेतृत्व में दल रामकी प्लांट गया. वहां कंटेनर की सील लगी देख कर संतोष जताया.
-भारत एक्सप्रेस
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