सुप्रीम कोर्ट से ममता सरकार को झटका
I-PAC Raid West Bengal: सुप्रीम कोर्ट ने आई-पैक छापेमारी मामले में पश्चिम बंगाल सरकार को बड़ा झटका दिया है. कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अधिकारियों के खिलाफ दर्ज FIR पर रोक लगा दी है. साथ ही बंगाल सरकार को नोटिस जारी कर दो हफ्तों में जवाब मांगा है.
क्या है पूरा मामला
यह मामला 8 जनवरी 2026 को शुरू हुआ था. ED ने कोलकाता में TMC से जुड़ी पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म I-PAC के दफ्तर और उसके डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर पर छापेमारी की थी. यह छापेमारी कोयला घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस की जांच के तहत की गई थी. ED का आरोप है कि छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद मौके पर पहुंचीं. उन्होंने बंगाल पुलिस के अफसरों के साथ मिलकर जांच में रुकावट डाली और महत्वपूर्ण सबूत अपने साथ ले गईं.
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस विपुल पंचोली की बेंच ने कहा कि केंद्रीय जांच एजेंसी के काम में राज्य सरकार का दखल बहुत गंभीर मामला है. कोर्ट ने पूछा – अगर कोई केंद्रीय एजेंसी गंभीर अपराध की ईमानदारी से जांच कर रही है तो क्या राजनीति करके उसे रोका जा सकता है? अगर ऐसा होता रहा तो अराजकता फैल सकती है. कोर्ट ने साफ कहा कि ED को बिना किसी रुकावट के अपना काम करने दें.
कोर्ट के मुख्य आदेश
- ED अधिकारियों के खिलाफ दर्ज सभी FIR पर 3 फरवरी 2026 तक रोक.
- बंगाल पुलिस को छापेमारी वाली जगहों के CCTV फुटेज और अन्य रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्देश.
- इस मामले में अगली सुनवाई 3 फरवरी को होगी.
यह फैसला ममता बनर्जी सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. ED ने कोर्ट से मुख्यमंत्री और पुलिस अफसरों के खिलाफ CBI जांच की भी मांग की है.
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