TMC Crisis: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस लगातार संकट में घिरती जा रही है. पार्टी के भीतर टूट और इस्तीफों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा. गुरुवार को राज्यसभा सांसद कोयल मल्लिक ने पार्टी छोड़ दी. इसके साथ ही दक्षिण कोलकाता के चेयरमैन और पूर्व मंत्री मनीष गुप्ता ने भी इस्तीफा देकर राजनीति से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया.
मनीष गुप्ता का बड़ा फैसला
गुरुवार को पूर्व बिजली मंत्री और राज्य के पूर्व गृह सचिव मनीष गुप्ता ने साफ कर दिया कि वह न केवल तृणमूल कांग्रेस बल्कि पूरी राजनीति से दूरी बना रहे हैं. उन्होंने कहा कि उम्र और पार्टी में लंबे समय से निष्क्रिय रहने की वजह से उन्होंने यह कदम उठाया है.
इस्तीफे की वजह खुद बताई
गुप्ता ने कहा कि पिछले पांच साल से उन्हें पार्टी में कोई जिम्मेदारी नहीं दी गई. उनका इस्तेमाल नहीं किया गया और अब 85 साल की उम्र में उन्होंने राजनीति छोड़ने का निर्णय लिया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि वह किसी गुट से जुड़े नहीं हैं और पूरी तरह राजनीति से संन्यास ले रहे हैं.
शहीद दिवस से पहले इस्तीफा
21 जुलाई 1993 को हुए राइटर्स अभियान के दौरान गुप्ता गृह सचिव थे और उस समय हुई फायरिंग में कई कार्यकर्ताओं की मौत हुई थी. उसी घटना की याद में तृणमूल कांग्रेस हर साल 21 जुलाई को शहीद दिवस मनाती है. इस बार शहीद दिवस से पहले ही गुप्ता ने पार्टी छोड़ने का ऐलान कर दिया.
विवादों से जुड़ा नाम
उस गोलीकांड में गुप्ता का नाम बार-बार सामने आया और काफी विवाद हुआ. हालांकि 2011 में सत्ता परिवर्तन के बाद वह ममता बनर्जी की पार्टी में शामिल हुए और मंत्री भी बने. लेकिन अब उन्होंने राजनीति से पूरी तरह दूरी बना ली है.
शुभेंदु अधिकारी की तारीफ
इस्तीफे के बाद गुप्ता ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की जमकर प्रशंसा की. उन्होंने कहा कि बंगाल को ऐसा कुशल प्रशासक मिला है जो विकास को नई दिशा दे रहा है. उनके मुताबिक अधिकारी जिस तरह से प्रशासनिक फैसले ले रहे हैं, उससे राज्य का विकास रुक नहीं सकता.
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-भारत एक्सप्रेस
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