TMC Internal Revolt
TMC Internal Revolt: बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (TMC) को मिली हार के बाद पार्टी के अंदर हलचल तेज हो गई है. पार्टी नेताओं और जनप्रतिनिधियों के बीच असंतोष खुलकर सामने आने लगा है. इसी बीच टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार के रुख ने सियासी चर्चाओं को और तेज कर दिया है. मंगलवार को उन्होंने पार्टी के छह विधायकों के साथ मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की प्रशासनिक समीक्षा बैठक में हिस्सा लिया, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं.
दरअसल, काकोली घोष ने हाल ही में टीएमसी के बारासात संगठनात्मक जिला अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया था. इससे पहले उन्हें संसदीय दल के मुख्य सचेतक पद से हटाकर उनकी जगह कल्याण बनर्जी को जिम्मेदारी दी गई थी. उस फैसले के बाद काकोली ने सोशल मीडिया पर नाराजगी जाहिर करते हुए लिखा था कि चार दशक की वफादारी का उन्हें यही इनाम मिला है. ऐसे में बीजेपी सरकार की आधिकारिक बैठक में उनकी मौजूदगी को सिर्फ प्रशासनिक नहीं बल्कि राजनीतिक नजरिए से भी काफी अहम माना जा रहा है.
कई विधायक भी हुए शामिल
इस बैठक में काकोली घोष के अलावा देगंगा से विधायक अनीसुर रहमान बिस्वास, स्वरूपनगर की बीना मंडल, हरोआ के मोहम्मद अब्दुल मतीन समेत बसीरहाट इलाके के अन्य विधायक भी शामिल हुए. बैठक में उत्तर 24 परगना, नदिया और हुगली जिलों के अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद थे.
हालांकि बैठक में शामिल टीएमसी नेताओं ने इसे सिर्फ विकास कार्यों से जुड़ा कार्यक्रम बताया. विधायक बीना मंडल ने कहा कि वह अपने क्षेत्र के विकास के मुद्दों को लेकर बैठक में पहुंची थीं. वहीं मोहम्मद अब्दुल मतीन ने भी कहा कि राज्य सरकार की ओर से निमंत्रण मिला था, इसलिए वह विधायक के तौर पर शामिल हुए.
शुभेंदु अधिकारी ने बताया नई शुरुआत
बैठक के बाद शुभेंदु अधिकारी ने इसे बंगाल की राजनीति में नई शुरुआत बताया. उन्होंने कहा कि जब बीजेपी विपक्ष में थी, तब उनके विधायकों को प्रशासनिक बैठकों में नहीं बुलाया जाता था, लेकिन अब सरकार ने सभी जनप्रतिनिधियों को साथ लेकर चलने का फैसला किया है. उन्होंने यह भी कहा कि जनता को डबल इंजन सरकार का फायदा मिलना चाहिए और राजनीतिक लड़ाई सिर्फ चुनाव तक सीमित रहनी चाहिए.
100 पार्षद दे चुके हैं इस्तीफा
उधर, टीएमसी के भीतर बढ़ती नाराजगी अब नगर निकायों तक पहुंच चुकी है. पिछले कुछ दिनों में अलग-अलग नगरपालिकाओं के करीब 100 पार्षद इस्तीफा दे चुके हैं. इससे कई नगर निकायों में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ गई है और बीजेपी को वहां अपनी पकड़ मजबूत करने का मौका मिलता दिख रहा है. ऐसी भी चर्चा है कि अगले साल होने वाले नगर निकाय चुनाव से पहले कई नगरपालिका बोर्ड भंग किए जा सकते हैं.
ममता के कई सहयोगियों ने छोड़ा पद
आजतक बांग्ला की रिपोर्ट के मुताबिक, कोलकाता के मेयर और ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी फिरहाद हाकिम ने भी पद छोड़ने की इच्छा जताई है. हालांकि ममता बनर्जी ने हाल ही में पार्षदों से इस्तीफा न देने की अपील की थी, लेकिन इसके बावजूद पार्टी के भीतर असंतोष थमता नजर नहीं आ रहा.
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1998 में कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस बनाने के बाद से पार्टी शायद पहली बार इतने बड़े अंदरूनी संकट का सामना कर रही है. अब तक हर मुश्किल दौर में ममता बनर्जी पार्टी को एकजुट रखने में सफल रही थीं, लेकिन इस बार हालात पहले से कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण दिखाई दे रहे हैं.
-भारत एक्सप्रेस
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