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कौन से हैं दो बिल जो लोकसभा में हंगामें के बीच हो गए पास?

लोकसभा में विपक्ष के हंगामे के बीच केरल (नाम में बदलाव) बिल 2026 और NCDC संशोधन बिल 2026 बिना चर्चा के पास हुए. जानिए इन दोनों विधेयकों के प्रमुख प्रावधान

Lok Sabha, Monsoon Session

विपक्ष के भारी हंगामे और नारेबाजी के बीच लोकसभा में दो महत्वपूर्ण विधेयक बिना किसी विस्तृत चर्चा के पास हो गए हैं. इनमें राज्य का नाम आधिकारिक रूप से बदलने से जुड़ा केरल (नाम में बदलाव) विधेयक, 2026 और देश के ग्रामीण आर्थिक ढांचे को मजबूती देने वाला राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 शामिल है.

विपक्ष के लगातार विरोध और शोर-शराबे के बीच दोनों विधेयकों को ध्वनिमत से मंजूरी दे दी गई. गौरतलब है कि चालू सत्र के दौरान लोकसभा में अब तक पारित हुए कुल 11 बिलों में से केवल 2 बिलों पर ही सदन में बहस हो सकी है, जबकि बाकी बिल विपक्ष के विरोध के बीच बिना चर्चा के पारित किए गए हैं.

1. केरल (नाम में बदलाव) विधेयक, 2026

यह विधेयक भारत के संविधान की पहली अनुसूची में संशोधन करने का प्रावधान करता है, जहां राज्यों के आधिकारिक नाम दर्ज हैं. मलयालम भाषा में इस राज्य को पारंपरिक और सांस्कृतिक रूप से हमेशा से ‘केरलम’ ही पुकारा जाता रहा है.

केरल विधानसभा ने पूर्व में सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से देश के संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी भाषाओं में राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने का आग्रह किया था. विधेयक के पूरी तरह कानून बनते ही केंद्र सरकार के सभी आधिकारिक दस्तावेजों, अंतरराष्ट्रीय संधियों, भाषाई रिकॉर्ड्स और राष्ट्रीय मानचित्रों में नया नाम ‘केरलम’ दर्ज हो जाएगा.

2. राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026

सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) बिल, 2026 पेश किया. लगातार हंगामे के बीच यह बिल भी बिना बहस के पारित हो गया. यह नया विधेयक दशकों पुराने ‘राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम अधिनियम, 1962’ में महत्वपूर्ण संशोधन करता है. इस संशोधन का प्राथमिक लक्ष्य राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) के कामकाज के दायरे को बढ़ाना और उसे फंड जुटाने व डिजिटल तकनीकों को अपनाने के लिए अधिक प्रशासनिक अधिकार देना है.

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इसके जरिए सहकारी समितियों, किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) और छोटे ग्रामीण उद्यमों को मिलने वाले लोन व वित्तीय सहायता की प्रक्रिया को बेहद तेज, लचीला और पारदर्शी बनाया जाएगा. इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी. बिचौलियों के बिना सीधे और त्वरित आर्थिक मदद मिलने से जमीनी स्तर पर काम कर रही सहकारी संस्थाओं को बढ़ावा मिलेगा, जिससे ग्रामीण रोजगार में भारी बढ़ोतरी होगी.

9 बिल बिना बहस के पास

लोकसभा में हंगामे के बीच बिना किसी विस्तृत चर्चा के ‘केरल (नाम में बदलाव) विधेयक, 2026’ और ‘राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026’ का पारित हो गया. हालांकि, चालू सत्र में 11 में से 9 बिल बिना किसी बहस के पास हो चुके हैं. अब देखना यह होगा कि उच्च सदन यानी राज्यसभा में इन विधेयकों की यात्रा कैसी रहती है और इन्हें पूरे देश में किस प्रकार से अमल में लाया जाता है.



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