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सिलेंडर वाली गैस या पाइप वाली? समझें LPG, CNG, PNG और LNG का क्या है फर्क

LPG, CNG, PNG और LNG के बीच मुख्य अंतर उनकी संरचना, भंडारण और इस्तेमाल के तरीके में है.

आज के दौर में रसोई से लेकर गाड़ी की टंकी तक और बड़े कारखानों से लेकर बिजली घरों तक, हम पूरी तरह गैस पर निर्भर हो चुके हैं. लेकिन अक्सर हमारे मन में ये सवाल आता है कि जब ये सब गैस ही हैं, तो इनके नाम इतने अलग-अलग क्यों हैं? कोई सिलेंडर में आती है, कोई पाइप से, तो कोई गाड़ी में डलती है.

अगर आप भी LPG, CNG, PNG और LNG के बीच के इस उलझाव को समझना चाहते हैं, तो चलिए इसे एकदम आसान भाषा में समझते हैं.

 LPG (Liquefied Petroleum Gas)

सबसे पहले बात करते हैं LPG (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) की. ये वही गैस है जो हमारे घरों में लाल या नीले सिलेंडर में भरकर आती है.

यह कच्चा तेल (Crude Oil) साफ करते वक्त एक बाई-प्रोडक्ट के रूप में निकलती है. इसमें मुख्य रूप से प्रोपेन और ब्यूटेन का मिश्रण होता है. इसकी सबसे बड़ी खूबी ये है कि हल्के से दबाव (Pressure) पर ही ये तरल (Liquid) बन जाती है. इसीलिए एक छोटे से सिलेंडर में बहुत सारी गैस समा जाती है.

LPG अगर कभी लीक हो जाए, तो ये ऊपर उड़ने के बजाय जमीन पर बैठ जाती है, जिससे आग लगने का खतरा बढ़ जाता है.

CNG (Compressed Natural Gas)

शहरों में ऑटो, बस और कारों के पीछे आपने CNG (कम्प्रेस्ड नेचुरल गैस) लिखा जरूर देखा होगा.

ये असल में ‘नेचुरल गैस’ (मीथेन) है, जिसे बहुत भारी दबाव के साथ सिलेंडर में भरा जाता है. ध्यान रहे, ये सिलेंडर में भी गैस के रूप में ही रहती है, तरल नहीं बनती. ये पेट्रोल और डीजल के मुकाबले काफी सस्ती पड़ती है और प्रदूषण भी बहुत कम फैलाती है. दिल्ली-मुंबई जैसे शहरों में अब इसके बिना ट्रांसपोर्ट की कल्पना करना भी मुश्किल है.

PNG (Piped Natural Gas)

आजकल बड़े शहरों की सोसायटियों में सिलेंडर लाने और ले जाने का चक्कर खत्म हो रहा है, उसकी जगह PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस) ने ले ली है. जो गैस CNG के रूप में गाड़ियों में डलती है, वही गैस जब पाइपलाइन के जरिए सीधे आपके किचन तक पहुंचती है, तो उसे PNG कहते हैं.

PNG हवा से हल्की होती है. अगर लीक हुई, तो खिड़की-रोशनदान से तुरंत बाहर निकल जाएगी, जमीन पर जमा नहीं होगी. साथ ही, इसमें आपको सिलेंडर खत्म होने का डर नहीं रहता; बस मीटर लगाइए और इस्तेमाल के हिसाब से बिल भरिए.

LNG (Liquefied Natural Gas)

LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) को आप नेचुरल गैस का ‘एक्सपोर्ट वर्जन’ कह सकते हैं. जब नेचुरल गैस को पाइप से भेजना मुमकिन नहीं होता, तो उसे -162 डिग्री सेल्सियस तक ठंडा किया जाता है. इतने कम तापमान पर ये तरल बन जाती है और इसका साइज 600 गुना कम हो जाता है.

इसे बड़े-बड़े समुद्री जहाजों के जरिए एक देश से दूसरे देश भेजा जाता है. भारत में इसका इस्तेमाल बिजली घरों, खाद बनाने वाली कंपनियों और अब लंबी दूरी के ट्रकों में भी होने लगा है.

गैस का नाम मुख्य तत्व कहां इस्तेमाल होती है खास बात
LPG प्रोपेन + ब्यूटेन रसोई (सिलेंडर) आसानी से स्टोर हो जाती है
CNG मीथेन कार, बस, ऑटो सस्ता और साफ ईंधन
PNG मीथेन घरों में पाइप से सुरक्षित और बेहद सुविधाजनक
LNG मीथेन भारी उद्योग, जहाज ठंडा करके तरल बनाई जाती है

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-भारत एक्सप्रेस



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