UN में भारत का 'राइट टू रिप्लाई'
UNGA Pakistan Shehbaz Sharif: संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने जब अपनी चिर-परिचित भारत-विरोधी बयानबाजी खत्म की, तो भारत ने तुरंत ‘राइट टू रिप्लाई’ का इस्तेमाल करते हुए उनके झूठ और नाटक की धज्जियां उड़ा दीं. भारत के स्थायी मिशन की प्रथम सचिव पेटल गहलोत ने मंच से ऐसा करारा पलटवार किया कि पाकिस्तान की विदेश नीति की पोल खुल गई.
यह महज़ कोई कूटनीतिक जवाब नहीं था, बल्कि एक सच्चाई का पर्दाफाश था जिसने दुनिया को बताया कि आतंकवाद को महिमामंडित करना आज भी इस्लामाबाद की विदेश नीति का मुख्य हिस्सा है.
झूठ नंबर 1: ऑपरेशन सिंदूर पर ‘7 जेट’ का मनगढ़ंत दावा
शहबाज शरीफ ने अपने भाषण में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ (पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारत द्वारा किया गया सैन्य अभियान) का जिक्र करते हुए दावा किया कि मई में हुए संघर्ष के दौरान भारत के 7 जेट क्षतिग्रस्त किए गए.
शहबाज शरीफ पर पेटल गहलोत ने पलटवार किया
“महोदय, आज सुबह इस सभा ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की ओर से बेतुके नाटक देखे… मगर, कोई भी ड्रामा और कोई भी झूठ तथ्यों को छिपा नहीं सकता.”
गहलोत ने UNGA को याद दिलाया कि भारतीय वायुसेना प्रमुख अमरप्रीत सिंह ने पिछले महीने ही स्पष्ट किया था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय जेट्स ने पाकिस्तान के 5 लड़ाकू जेट और एक बड़े विमान को मार गिराया था. उन्होंने तीखे लहजे में कहा कि पाकिस्तान जिस ‘जीत’ की बात कर रहा है, वह दरअसल उनके नष्ट हुए एयरबेस, जले हुए हैंगर और टूटे हुए रनवे की सार्वजनिक रूप से उपलब्ध तस्वीरें हैं.
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झूठ नंबर 2: आतंकवाद पर दोहरा रवैया
आतंकवाद के मुद्दे पर गहलोत ने पाकिस्तान को चारों खाने चित कर दिया. उन्होंने कहा कि एक ऐसा देश जो “लंबे समय से आतंकवाद को बढ़ावा देने और निर्यात करने की परंपरा में डूबा हुआ है”, उसे इस तरह के हास्यास्पद कथन देने में कोई शर्मिंदगी नहीं है.
गहलोत ने पाकिस्तान को दो कड़वी सच्चाइयां याद दिलाईं
“हमें याद रखना चाहिए कि इसने ओसामा बिन लादेन को एक दशक तक शरण दी, तब भी जब यह आतंकवाद के खिलाफ युद्ध में साझेदारी का दिखावा कर रहा था.”
उन्होंने याद दिलाया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बहावलपुर और मुरिदके आतंकी परिसरों में मारे गए आतंकियों की तस्वीरें मौजूद हैं, जिन्हें पाकिस्तान के सीनियर सैन्य और नागरिक अधिकारियों ने सार्वजनिक रूप से महिमामंडित किया और श्रद्धांजलि दी.
गहलोत ने यह भी याद दिलाया कि 25 अप्रैल को यूएन सुरक्षा परिषद में पाकिस्तान ने ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ जैसे पाकिस्तान-प्रायोजित आतंकी संगठन का भी बचाव किया था, जो जम्मू-कश्मीर में पर्यटकों के नरसंहार के लिए जिम्मेदार है.
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भारत का दो टूक संदेश
पेटल गहलोत ने यह भी स्पष्ट किया कि 9 मई तक पाकिस्तान भारत पर और हमलों की धमकी दे रहा था, लेकिन 10 मई को सेना ने हमसे सीधे युद्ध को रोकने की गुहार लगाई. अंत में, भारत ने दुनिया के सबसे बड़े मंच से एक बार फिर साफ किया कि भारत और पाकिस्तान के बीच जो भी मुद्दे हैं, वे केवल द्विपक्षीय स्तर पर ही सुलझाए जाएंगे और इसमें किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं होगी.
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