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UP Assembly Election 2027: उत्तर प्रदेश में होने वाले 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सियासी एक्सरसाइज शुरू हो गई है. ऐसा लग रहा है बीजेपी के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह पार्टी में सहज महसूस नहीं कर रहे हैं. वजह है ठाकुर नेताओं के बीच वर्चस्व की लड़ाई.
सीएम योगी बनाम बृजभूषण
एक तरफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुस्लिम आक्रांताओं का मुद्दा उठाकर समाजवादी पार्टी पर निशाना साध रहे हैं और हिंदू वोटों को अपने पक्ष में करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं. वहीं दूसरी तरफ बृजभूषण शरण सिंह लगातार सीएम योगी के बयानों को गलत ठहरा रहे हैं.
पार्टी में अंदरूनी टकराव
इस टकराव ने चर्चाओं को जन्म दे दिया है कि क्या बीजेपी के भीतर ठाकुर नेताओं के बीच शक्ति संघर्ष शुरू हो गया है. सवाल यह भी उठ रहा है कि बृजभूषण शरण सिंह पार्टी छोड़कर किसी दूसरी राजनीतिक ताकत का हिस्सा बन सकते हैं? क्या है पूरा मामला, आइए जानते हैं.
हनुमानगढ़ी में नमाज विवाद
अयोध्या की हनुमानगढ़ी को लेकर एक नया विवाद सामने आया है. दावा किया गया कि यहां नमाज पढ़ी गई थी. इस पर बीजेपी के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि ऐसी बातें बिल्कुल गलत हैं. उन्होंने गोंडा में एक कार्यक्रम के दौरान मीडिया से कहा कि हनुमानगढ़ी जैसी पवित्र जगह पर कभी नमाज नहीं हुई और यह सब लोगों को गुमराह करने की कोशिश है.
निर्माण को लेकर दावा
बृजभूषण शरण सिंह यही नहीं रुक उन्होंने आगे कहा कि जो लोग नमाज पढ़ने की बात कर रहे हैं उन्हें इतिहास समझना चाहिए. उन्होंने दावा किया कि हनुमानगढ़ी का निर्माण एक मुस्लिम व्यक्ति ने कराया था और आज भी वहां उस व्यक्ति का नाम पत्थर पर लिखा हुआ है. उनका कहना है कि अयोध्या की परंपरा और इतिहास को जाने बिना बयान देना गलत है.
कैसे शुरू हुआ विवाद?
यह विवाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान के बाद शुरू हुआ. बीकापुर की जनसभा में उन्होंने समाजवादी पार्टी पर आरोप लगाया था कि पिछली सरकार के समय हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़वाई गई थी. सीएम योगी ने सवाल उठाया कि जब किसी मस्जिद में हनुमान चालीसा नहीं पढ़ी जा सकती तो फिर मंदिर की सीढ़ियों पर नमाज कैसे पढ़ी गई?
ठाकुर बनाम ठाकुर
बृजभूषण शरण सिंह द्वारा आयोजित राष्ट्रकथा कार्यक्रम के दौरान एक वीडियो वायरल हुआ था. इसमें चर्चा थी कि क्षत्रिय समाज का सबसे बड़ा नेता कौन है? इस पर बृजभूषण शरण सिंह नाराज हो गए और उन्होंने साफ कहा कि राजनीति में राजनाथ सिंह ही सबसे बड़े क्षत्रिय नेता हैं.
बीजेपी से टूट जाएगा नाता?
बृजभूषण शरण सिंह लगातार अपनी ही पार्टी और सीएम योगी के खिलाफ बयान दे रहे हैं. इसी वजह से अब सवाल उठने लगे हैं कि क्या उनका बीजेपी से मोहभंग हो गया है और वो किसी दूसरी पार्टी का रुख कर सकते हैं?
चर्चा तो ये भी है कि वो समाजवादी पार्टी में शामिल हो सकते हैं. ये मैं नहीं बोल रहा हूं. ये हाल के दिनों में हुई कुछ घटनाएं बयां कर रही हैं।
पहलवानों का आरोप
आपको ये तो याद होगा कि जब बृजभूषण शरण सिंह भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष थे तब उन पर महिला पहलवानों ने यौन शोषण का आरोप लगाया था. जंतर‑मंतर पर पहलवानों ने धरना भी दिया था. मामला इतना बढ़ा कि दिल्ली पुलिस ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली थी. इस दौरान कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और कई अन्य दल पहलवानों के समर्थन में आए. वहीं, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मुद्दे पर कोई टिप्पणी नहीं की थी.
अखिलेश यादव की तारीफ
बृजभूषण शरण सिंह इसी वजह से उस समय अखिलेश यादव की तारिफ करते हुए नजर आएं थे. उन्होंने कहा था कि अखिलेश जी सच जानते हैं. मुझे राजनीतिक साजिश का शिकार बनाया जा रहा है. उनकी यह बात चर्चा में रही थी.
सपा का था निर्देश
समाजवादी पार्टी ने भी अपने प्रवक्ताओं को साफ हिदायत दी थी कि किसी भी टीवी डिबेट या चर्चा में बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ कुछ भी न कहा जाए. यानी पार्टी ने अपने नेताओं को बयानबाजी में पूरी तरह संयम बरतने को कहा था.
सपा में शामिल होने का सफर
एक समय ऐसा भी आया जब बृजभूषण शरण सिंह को बीजेपी से बाहर कर दिया गया था. वजह थी यूपीए सरकार के पक्ष में उनकी वोटिंग. इसके बाद उन्होंने साल 2008 में समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया. हालांकि कुछ साल बाद, 2013 में वे फिर से बीजेपी में लौट आए. उस दौर में राजा भैया से रिश्ते बिगड़ने के कारण पार्टी के पास कोई बड़ा ठाकुर नेता नहीं बचा था जो सीधे तौर पर जनता को प्रभावित कर सके और ठाकुर वोट सपा की तरफ खींच सके. यही वजह थी कि बीजेपी भी असमंजस में रही.
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‘अखिलेश यादव क्षत्रिय’
एक समय में पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव को क्षत्रिय करार दिया था. उन्होंने कहा था कि अखिलेश यादव भगवान श्रीकृष्ण को अपना पूर्वज मानते हैं और चूंकि श्रीकृष्ण क्षत्रिय थे इसलिए अखिलेश यादव भी क्षत्रिय हैं.
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