उत्तराखंड ग्लेशियर हिमस्खलन
Uttarakhand Glacier Avalanche Rescue Operation: उत्तराखंड के माणा (Mana) में हुए भीषण हिमस्खलन (Avalanche) के बाद सेना, एनडीआरएफ (NDRF) और आईटीबीपी (ITBP) की टीमों ने 60 घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन को सफलतापूर्वक पूरा किया. इस त्रासदी में 8 मजदूरों की मौत हो गई, जबकि 54 श्रमिकों को सुरक्षित बचा लिया गया.
माणा हिमस्खलन: कैसे हुआ हादसा?
माणा में निर्माण कार्य में लगे मजदूर अचानक हुए ग्लेशियर ब्रेक (Glacier Break) की चपेट में आ गए. भारी बर्फबारी और प्रतिकूल मौसम के बीच राहत एवं बचाव कार्य में कई चुनौतियां आईं, लेकिन आधुनिक तकनीकों (Advanced Rescue Techniques) और बचाव दलों की तत्परता से ऑपरेशन को सफल बनाया गया.
रेस्क्यू ऑपरेशन: 60 घंटे तक चला जीवन रक्षक अभियान
- भारतीय सेना, आईटीबीपी और एनडीआरएफ के 200 से अधिक जवानों ने इस अभियान में भाग लिया.
- बचाव कार्य के दौरान खोजी कुत्तों (Rescue Dogs), थर्मल इमेजिंग उपकरणों (Thermal Imaging Devices) और अन्य आधुनिक उपकरणों का उपयोग किया गया.
- -12°C से -15°C के तापमान में भी जवानों ने अथक परिश्रम कर 54 लोगों की जान बचाई.
- ऑपरेशन के अंत में अंतिम शव बरामद होने के बाद मिशन को समाप्त घोषित किया गया.
रेस्क्यू ऑपरेशन की मुख्य विशेषताएं
- 54 मजदूरों को सुरक्षित निकाला गया, जिनका इलाज चल रहा है.
- 8 मजदूरों की मौत, अंतिम शव रविवार को निकाला गया.
- कठिन परिस्थितियों और भारी बर्फबारी के बावजूद सफल बचाव अभियान.
- आधुनिक तकनीकों का उपयोग, जिससे फंसे लोगों का तेजी से पता लगाया गया.
- आईटीबीपी हिमवीरों, सेना और NDRF के जवानों ने साहसिक समन्वय दिखाया.
भारतीय सेना और ITBP का अभूतपूर्व समर्पण
इस चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू मिशन में आईटीबीपी (ITBP) के हिमवीरों, भारतीय सेना (Indian Army) और एनडीआरएफ (NDRF) की टीमों ने जीवनरक्षक भूमिका निभाई. उन्होंने साबित किया कि किसी भी कठिन परिस्थिति में भारतीय सुरक्षा बल जनता की सुरक्षा के लिए तत्पर रहते हैं.
-भारत एक्सप्रेस
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