Bharat Express DD Free Dish

“सेतु टूटा, नाव बना सहारा… लेकिन सुरक्षा भगवान भरोसे!” विक्रमशिला सेतु ध्वस्त लोग नाव से कर रहे सफर; लाइफ जैकेट का अभाव बना खतरा

Vikramshila Setu Damage Matter:

vikramshila setu damage matter

vikramshila setu damage matter

Vikramshila Setu Damage Matter: भागलपुर/ अंजनी कुमार कश्यप: भागलपुर में विक्रमशिला सेतु के टूटने के बाद जिंदगी जैसे 30 साल पीछे लौट गई है. गंगा पार करने के लिए अब लोगों का सहारा नाव बन गई है. लेकिन इस सफर में खतरा भी उतना ही बड़ा है. हजारों लोग रोज नाव से सफर कर रहे हैं, मगर सुरक्षा के इंतजाम नाकाफी हैं. भागलपुर को सीमांचल से जोड़ने वाली लाइफ लाइन विक्रमशिला सेतु का पिलर नंबर 7 और 8 के बीच का हिस्सा गंगा में समा जाने के बाद सड़क संपर्क पूरी तरह ठप हो गया है. अब हालात ऐसे हैं कि लोग नाव के सहारे गंगा पार करने को मजबूर हैं.  नावों पर यात्रियों के लिए लाइफ जैकेट की कोई व्यवस्था नहीं है. सिर्फ नाविक के पास एक लाइफ जैकेट मौजूद है, जबकि क्षमता से ज्यादा यात्रियों को बैठाया जा रहा है. ऐसे में जरा सी चूक बड़ा हादसा बन सकती है.स्थिति की गंभीरता गंगा नदी की तेज धारा और ओवरलोडेड नावें किसी भी वक्त खतरे का संकेत दे रही हैं. यात्रियों का कहना है कि डर के साए में सफर करना उनकी मजबूरी बन गई है.

नाव से यात्रा करना बन गई है मजबूरी

हालांकि SDRF की टीम लगातार गंगा में गश्त कर रही है और प्रशासन की ओर से लाइफ जैकेट, ट्यूब और खाली बोतल रखने के निर्देश दिए गए हैं. लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि इन निर्देशों का पालन पूरी तरह नहीं हो रहा है. जब तक विक्रमशिला सेतु पर आवागमन बहाल नहीं होता है तब तक मजबूरी में लोगों को नाव से यात्रा करनी पड़ेगी. लेकिन सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि डर लगता है लेकिन कोई और विकल्प नहीं है. सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं है. “जान जोखिम में डालकर यात्रा करनी पड़ रही है. लाइफ जैकेट तक नहीं है.

ये भी पढ़ें:रद्द हुई NEET परीक्षा 2026; NTA जल्द ही जारी करेगा नई तारीखें!

4 मई को टूटा था पुल

बता दें कि 4 मई 2026 की रात को बिहार के भागलपुर में गंगा नदी पर बना 4.7 किलोमीटर लंबा विक्रमशिला सेतु का एक हिस्सा (पिलर नंबर 133 के पास) टूटकर गंगा में गिर गया था. जिससे उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच का प्रमुख संपर्क टूट गया है। इस हादसे के बाद, जान जोखिम में डालकर रोजाना हजारों लोग नावों के सहारे गंगा पार करने को मजबूर हैं.

  • भारत एक्सप्रेस


इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read