Vijay victory In Tamil Nadu
Vijay victory In Tamil Nadu: 4 मई का दिन भारतीय राजनीति के इतिहास में एक नया मोड़ लेकर आया. इस दिन भारत के 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित हुए, जिसने देश की राजनीति का नक्शा बदल दिया. बंगाल में जहां बीजेपी पहली बार सत्ता के शीर्ष पर पहुंची, तो वहीं असम और पुडुचेरी में एक बार फिर सरकार बनाई. ये चुनाव कांग्रेस के लिए भी खुशखबरी लेकर आया, लेकिन सबसे बड़ी लकीर तमिलनाडु में अभिनेता से नेता बने एक्टर विजय ने खींची. उन्होंने पहली बार में ही तमिल पॉलिटिक्स को धुआं-धुआं करते हुए राज्य में विजयी पताका फहरा दिया. हालांकि उन्हें पूर्ण बहुमत नहीं मिल पाया है, लेकिन TVK सूबे की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी.
तमिलनाडु में एक्टर विजय और उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) अपने पहले ही चुनावी समर में निर्णायक ताकत बनकर उभरी. उनके इस सियासी उभार के सामने DMK,AIDMK, कांग्रेस और बीजेपी जैसे दिग्गज कमजोर पड़ गए.
2 साल में सत्ता के शीर्ष पर पहुंचे विजय
एक्टर विजय की जीत पर देश की राजनीतिक मिजाज पर नजर रखने वाले विश्लेषक भौचक्का रह गए. वो समझ नहीं पा रहे हैं कि आखिर जिस राज्य में तमिल पॉलिटिक्स इतनी हावी है, उसमें 2 साल पहले बनी पार्टी ने कैसे जीत का सेहरा अपने सिर सजा लिया.
From screen to सत्ता, Thalapathy Vijay makes a historic political entry 🔥 Tamil Nadu politics just changed.#electionresults2026 #TVKForTN pic.twitter.com/OWWByE8xNz
— Aman (@A_manSays) May 4, 2026
जेन-Z गेमचेंजर बनकर उभरे
विजय की इस सियासी उभार में युवा खासकर जेन-Z गेमचेंजर बनकर सामने आये. तमिलनाडु में करीब 21 प्रतिशत वोटर्स 18 से 29 साल के हैं. इनमें से भी 14 लाख से ज्यादा वोटर्स ने पहली बार वोट किया. ये जेन-Z युवा विजय की फिल्मों को देखते हुए बड़े हुए हैं. जिसमें एक्टर भ्रष्टाचार, गरीबी, दमन और रोजगार जैसे मुद्दे उठाते रहे.
जब विजय ने तकरीबन 2 साल पहले अपनी पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम को शुरू किया, तो इन युवाओं में बदलाव का मैसेज गया. गौरतलब है कि पिछले 60 सालों से तमिलनाडु में DMK और AIDMK की सरकार रही. इन युवाओं को विजय ने नए तेवर और कलेवर के साथ-साथ नया नेतृत्व का विकल्प दिया. इन युवाओं के अंदर बदलाव, बेहतर भविष्य की चाह, रोजगार सहित नई राजनीति की उम्मीद थी. जो चुनाव परिणाम में साफ दिखाई दी.
द्रविण राजनीति से अलग धर्मनिरपेक्ष तस्वीर पेश की
अपने पहले ही चुनाव में सत्ता के इतने करीब पहुंचने वाले थलपति विजय ने द्रविड़ राजनीति वाले इस राज्य में खुद को एक धर्मनिरपेक्ष नेता के तौर पर पेश किया. विजय ईसाई समुदाय से आते हैं और इस धर्म के अनुयायी तमिलनाडु में मात्र 6-7 प्रतिशत हैं. ऐसे में उन्होंने द्रविड़ राजनीति से अलग एक बेहतर सुशाशन और राजनीतिक समझ के तौर पर खुद को पेश किया. जिसका परिणाम ये हुआ कि उन्हें युवाओं के साथ-साथ अन्य सभी जातीय और समुदायों का समर्थन मिला.
बेहतरीन चुनावी रणनीति ने काम किया आसान
विजय ने अपने पूरे प्रचार के दौरान सिर्फ DMK पर हमले किये. उन्होंने DMK सरकार में फैले भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद सहित रोजगार को अपना एजेंडा बनाया. वो अपनी रैलियों में कहते थे कि इस चुनावी जंगल में सभी लोग एक साथ आए हैं, लेकिन जंगल का राजा सिर्फ एक है. इस तरह के फिल्मी डॉयलॉग के जरिये विजय यह नैरेटिव बनाने में सफल हुए कि उनका मुकाबला DMK से है, बाकि उनके सामने कहीं खड़े भी नहीं दिखाई दे रहे. उन्होंने अपनी फिल्मों की तरह ही चुनाव प्रचार में भ्रष्टाचार पर हमला, रोजगार, सुधार और नई राजनीति जैसे मुद्दों को हवा दी. इसके अलावा उन्होंने महिलाओं को हर महीने आर्थिक मदद भी देने का वादा किया. जिसने चुनावी परिणाम में अहम भूमिका निभाई.
विजय आर्मी ने निभाई अहम भूमिका
एक्टर विजय को विधानसभा चुनाव में अचानक से सफलता नहीं मिली, बल्कि इसके पीछे दशकों से चली आ रही उनकी सोची-समझी रणनीति थी. साल 2011 के तमिलनाडु चुनाव में विजय ने जे. जयललिता और AIDMK गठबंधन को समर्थन किया था. उस समय उनके पिता एस.ए. चंद्रशेखर ने इसकी तुलना रामायण के उस गिलहरी से की थी, जिसने भगवान राम को लंका तक पुल बनाने के लिए अपने हाथों में छोटे-छोटे कंकड़ उठाकर समुद्र में डाल रही थी. उनका विचार था कि छोटे-छोटे योगदान अगर सामूहिक रूप से किये जाएं तो यह एक बड़ी जीत में तब्दील हो जाती है.
‘गिलहरी’ का भी रहा योगदान
इसके बाद उनके प्रशंसकों ने इकट्ठा होकर एक आर्मी बनाई, जिसका नाम विजय ‘अनिल’ आर्मी रखी गई. अनिल शब्द तमिल राजनीति में गहराई से जुड़ा हुआ है. जिसका अर्थ होता है गिलहरी.
विजय की यह आर्मी पिछले एक दशक से लगातार सक्रिय है. इसमें हजारों प्रशंसक आगे बढ़कर लोगों की सेवा करते हैं. जिसमें रक्तदान शिविर, राहत कार्य, छात्रों की मदद सहित कई तरह के कार्य शामिल हैं. इनकी मदद से एक्टर विजय बिना चुनावी मैदान में उतरे ही जनता के बीच गहरी पैठ बना ली थी. जब चुनाव परिणाम 4 मई को घोषित हुए तो उस काम का वोटिंग पैटर्न उसमें साफ दिखाई दे रहा था.
ये भी पढ़ें- बंगाल में नहीं थमने वाले सुवेंदू! बोले- राहुल, तेजस्वी, ममता खत्म; बताया अब अगली बारी किसकी?
तमिलनाडु में अभिनेता से नेता बने विजय ने जिस अंदाज में सत्ता तक पहुंच बनाई है, वो अरविंद केजरीवाल की याद दिलाती है. ऐसी राजनीति भावुकता के आधार पर आगे बढ़ती है, जो शासन चलाने की सच्चाईयों से जब रूबरू होती है तो भावनाएं टूटकर चकनाचूर हो जाती हैं. विजय के सामने लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरने की चुनौती है.
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

