Kolkata Warehouse Accident: कोलकाता के तारातला इलाके में बन रहे एक गोदाम की छत गिरने से हुआ हादसा अब और भी गंभीर हो गया है. शुक्रवार सुबह तक इस दर्दनाक घटना में मरने वालों की संख्या बढ़कर 15 पहुंच गई है. मलबे में दबे लोगों को निकालने के लिए राहत और बचाव कार्य लगातार जारी रहा, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, स्थिति और भयावह होती चली गई.
घटना के बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने कड़ा कदम उठाते हुए निर्माण कार्य से जुड़ी कंपनी और आर्किटेक्ट दोनों को ब्लैकलिस्ट करने का फैसला किया है. इसका मतलब साफ है कि अब ये लोग राज्य में किसी भी सरकारी या निजी निर्माण परियोजना में हिस्सा नहीं ले सकेंगे.
मुख्यमंत्री ने मीडिया से बातचीत में साफ कहा कि इस पूरे मामले में गंभीर लापरवाही बरती गई है. उनके मुताबिक, न तो सही तरीके से निगरानी रखी गई और न ही निर्माण मानकों का पालन हुआ. इसी वजह से इतना बड़ा हादसा हुआ.
कोलकाता पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम की शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि हादसे की दो मुख्य वजहें हो सकती हैं. खराब गुणवत्ता की निर्माण सामग्री और गलत कास्टिंग पैटर्न का इस्तेमाल. ये दोनों ही वजहें किसी भी मजबूत ढांचे के लिए बेहद खतरनाक मानी जाती हैं.
कोलकाता पुलिस के मुताबिक, साइट पर काम करने वाले मजदूरों की सही संख्या का भी कोई रिकॉर्ड नहीं था, क्योंकि वहां किसी तरह का अटेंडेंस रजिस्टर ही नहीं रखा गया था. इस वजह से यह भी साफ नहीं हो पाया है कि मलबे के नीचे और कितने लोग दबे हो सकते हैं.
जमीन से लेकर निर्माण तक की पूरी कहानी
जानकारी के अनुसार, शंभूनाथ बेहरा नाम के व्यक्ति ने कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट अथॉरिटी (Kolkata Port Trust Authority) से 30 साल की लीज पर जमीन ली थी. इस जमीन पर तीन मंजिला गोदाम बनाने की योजना थी. निर्माण का काम बाद में अयान ट्रेडर्स (Ayan Traders) को सौंप दिया गया, जो पहले से ही पोर्ट क्षेत्र में कई प्रोजेक्ट संभाल रही थी.
सरकार की चेतावनी और जनता से अपील
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि इस मामले में जिम्मेदारी तय करना बेहद जरूरी है और दोषियों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा. उन्होंने जनता से अपील की कि अगर कहीं भी निर्माण कार्य में गड़बड़ी या धोखाधड़ी दिखे तो तुरंत पुलिस को सूचना दें.
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