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बंगाल में मुस्लिम OBC ‘सफाया’! शुवेंदु सरकार ने 77 में से 65 मुस्लिम जातियां लिस्ट से हटाईं, ममता राज में 90% थीं अब सिर्फ इतनी जातियां बचीं

West Bengal OBC reform: पश्चिम बंगाल में शुवेंदु अधिकारी सरकार ने ओबीसी आरक्षण और सूची में बड़ा बदलाव किया है. मुस्लिम समुदाय की 12 जातियां ही अब ओबीसी सूची में शामिल हैं.

West Bengal OBC reform: पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद मुख्यमंत्री शुवेंदु अधिकारी की अगुवाई वाली बीजेपी सरकार लगातार बड़े फैसले ले रही है. ममता बनर्जी के कार्यकाल में लिए गए कई निर्णयों को पलटते हुए सोमवार को ओबीसी सूची का पुनर्गठन किया गया. इस बदलाव के तहत कई जातियों को बाहर कर दिया गया और ओबीसी आरक्षण का कोटा 17 फीसदी से घटाकर 7 फीसदी कर दिया गया.

विधेयक के जरिए संशोधन

राज्य विधानसभा में पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग आयोग (संशोधन) विधेयक 2026 और आरक्षण से जुड़े अन्य विधेयक पारित किए गए. इन संशोधनों के जरिए 1993 के कानून में बदलाव कर दिया गया है. अब पुरानी मूल सूची को बहाल कर दिया गया है और ममता बनर्जी व लेफ्ट सरकार के समय जोड़ी गई जातियों को बाहर कर दिया गया है.

मुस्लिम जातियों पर असर

नए संशोधन के बाद ओबीसी सूची में केवल 66 जातियां बची हैं जिनमें 54 हिंदू और 12 मुस्लिम समुदाय की जातियां शामिल हैं. पहले की व्यवस्था में मुस्लिम जातियों का प्रतिनिधित्व 86 से 90 फीसदी तक पहुंच गया था लेकिन अब यह घटकर काफी कम हो गया है.

मंडल आयोग से शुरुआत

देशभर में मंडल आयोग लागू होने के बाद ओबीसी समुदाय को आरक्षण मिला. बंगाल में ज्योति बसु की सरकार ने 66 जातियों को ओबीसी श्रेणी में रखा. 2010 में बुद्धदेव भट्टाचार्य सरकार ने 42 नई जातियां जोड़ीं और मुस्लिम समुदाय के लिए 10 फीसदी आरक्षण का प्रावधान किया.

ममता बनर्जी का विस्तार

2012 में ममता बनर्जी सरकार ने ओबीसी सूची में 35 और जातियां जोड़ीं. इसके बाद कुल 113 उप-जातियां शामिल हो गईं जिनमें 77 मुस्लिम और 36 हिंदू समुदाय की थीं. इस बदलाव से ओबीसी सूची में मुस्लिम जातियों का दबदबा बढ़ गया.

कोर्ट का हस्तक्षेप

मई 2024 में कलकत्ता हाईकोर्ट ने ममता और लेफ्ट सरकार के समय जोड़ी गई 77 जातियों की मान्यता रद्द कर दी. अदालत ने इन्हें असंवैधानिक करार दिया और 2010 के बाद जारी किए गए लगभग 12 लाख ओबीसी प्रमाणपत्र अमान्य कर दिए. हालांकि, पहले से नौकरी पा चुके लोगों की नौकरी सुरक्षित रही.

नई व्यवस्था लागू

शुवेंदु सरकार ने कोर्ट के फैसले के बाद विधानसभा में संशोधन कर पुरानी सूची को बहाल किया. अब ओबीसी आरक्षण 17 फीसदी से घटाकर 7 फीसदी कर दिया गया है. केवल वही 66 जातियां सूची में रहेंगी जिन्हें 1993 में मान्यता दी गई थी.

ओबीसी में बची मुस्लिम जातियां

नई सूची में मुस्लिम समुदाय की 12 जातियां शामिल हैं. इनमें जुलाहा (बुनकर), फकीर, शाह, राइन (कुंजड़ा), शेरशाहबादिया, नई (हज्जाम), चौदुली मुस्लिम, पहाड़िया मुस्लिम, धुनिया या मंसूरी, कसाई (कुरैशी) जैसी जातियां हैं. ये जातियां सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ी मानी जाती हैं और 1993 से ओबीसी आरक्षण में शामिल हैं.

बाहर हुई मुस्लिम जातियां

ओबीसी सूची से हटाई गई जातियों में मुस्लिम नेहरिया, हलदर, सानपुई, माली, घोसी, दर्जी, ओस्तागर, इदरीसी, राजमिस्त्री, बटियारा, मोल्ला, धाली और अन्य शामिल हैं. हालांकि, उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश में ये जातियां अब भी ओबीसी सूची में हैं.

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आरक्षण की नई सीमा

शुवेंदु सरकार के फैसले से पहले बंगाल में कुल आरक्षण 45 फीसदी था. इसमें एससी के लिए 22 फीसदी, एसटी के लिए 6 फीसदी, ओबीसी-ए के लिए 10 फीसदी और ओबीसी-बी के लिए 7 फीसदी आरक्षण था. अब ओबीसी का कोटा घटाकर 7 फीसदी कर दिया गया है, जिससे कुल आरक्षण में 10 फीसदी की कमी आई है. मस्त हेडलाइन सुझाए.

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-भारत एक्सप्रेस



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