राष्ट्र कवि रामधारी सिंह दिनकर की 8 वी पुण्यतिथि पर रिस्पेक्ट इंडिया द्वारा आयोजित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सीजेआई सूर्यकांत ने कैबिनेट द्वारा सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाए जाने से संबंधित प्रस्ताव पर कहा कि सुप्रीम कोर्ट में इस वक्त अतिरिक्त जजों की आवश्यकता है क्योंकि हमारे यहां संवैधानिक पीठ के मामले सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं उन मामलों को निपटारे के लिए मैं चाहता हूं कि एक संवैधानिक पीठ लगातार काम करें तो उसके लिए सुप्रीम कोर्ट की तरफ से केंद्र सरकार का आभार व्यक्त करता हूं.
सीजेआई सूर्यकांत से जब पूछा गया कि क्या जजों की यह संख्या काफी है? इसपर उन्होंने कहा कि यह एक पॉलिसी मैटर है इसके बारे में मैं अभी कुछ नहीं बोलूंगा यह सरकार के ऊपर है कि वह कितनी संख्या जजों की बढ़ती हैं. सीजेआई कार्यक्रम के शुरुआत में जस्टिस बराले, पूर्व एडिशनल सॉलिसिटर जनरल और एससीबीए विकास सिंह, बीजेपी सांसद मनोज तिवारी और सभा में मौजूद अतिथियों का आभार प्रकट किया. सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि राष्ट्रकवि दिनकर जी के बारे में मेरे लिए बोलना सम्मान की बात है. उन्होंने कहा कि जहां पैदा हुए वहां साहित्य का अच्छा माहौल रहा. हमारे पिता को बड़े पुस्कार मिले.
उन्होंने कहा कि पिता जी का स्वभाव अलग था. मुंशी प्रेमचंद, रामधारी सिंह दिनकर जी सहित कई साहित्यकारों की किताबो का अध्ययन किया. उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि जैसे कविता मरहम करती है वैसा न्याय भी मरहम दे. समाज मे समरसता के साथ सामाजिक न्याय होना चाहिए. विकास का अर्थ सिर्फ आर्थिक विकास नही है. इसमें साहित्य की भी बड़ी भूमिका होती है.
समाज में असमानता अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है- सीजेआई
सीजेआई सूर्यकांत ने डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को याद करते हुए कहा कि अनुच्छेद 17 के माध्यम से कल्पना करते हुए असमानता को खत्म करने का काम किया. उस दौरान देश मे राष्ट्र के निर्माण का मूल मकसद था. हमारे संविधान में डॉक्टर अंबेडकर ने जिन बातों का जिक्र किया उसमें साहित्यकारों का भी बड़ा योगदान है. उन्होंने कहा कि हम नही मान सकते कि समाज मे असमानता नही है.
एआई को लेकर उन्होंने कहा कि इसने भी सोसाइटी में भेदभाव पैदा कर दिया है. ऐसा एक रिपोर्ट में देखने को मिला है. वही मनोज तिवारी को अवार्ड से सम्मानित भी किया.
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-भारत एक्सप्रेस
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