ऑनलाइन गेमिंग विधेयक 2025 को चुनौती देने वाली याचिका पर कर्नाटक हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. कोर्ट 8 सितंबर को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा. ऑनलाइन गेमिंग कंपनी A23 ने हाई कोर्ट में चुनौती दी है.
22 अगस्त को ऑनलाइन गेमिंग बिल 2025 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई थी. अब यह कानून बन गया है. कानून बनने के बाद से कई ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म्स की पॉपुलर प्रतियोगिताएं अचानक से बंद हो गई और ऑनलाइन गेमिंग की इंडस्ट्री का भविष्य भी अनिश्चित हो गया.
विधेयक के खिलाफ पहली याचिका की गई दाखिल
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की ओर से हस्ताक्षर करने के बाद इस कानून के खिलाफ कोर्ट ने यह पहली याचिका दाखिल की गई है. बता दें कि केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए कानून के तहत सभी ऑनलाइन मनी गेमिंग सेवाओं पर प्रतिबंध लगेगा.
नए कानून में मनी गेम का विज्ञापन करने पर दो साल तक कि कैद और 50 लाख रुपए तक का जुर्माना लगेगा. जबकि मनी गेम से संबंधित वित्तीय लेनदेन को बढ़ावा देने पर तीन साल तक कि कैद और एक करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा. जबकि बार-बार अपराध करने पर तीन से पांच साल की कैद और दो करोड़ रुपए तक जुर्माना लगाया जाएगा.
यह बात महत्वपूर्ण है कि विधेयक में प्रमुख धाराओं के तहत अपराधों को संज्ञेय और गैर जमानती बनाने की मांग की गई है.
विदेशी कंपनियां ऑनलाइन गेमिंग का नहीं कर सकती संचालन
इस विधेयक में ई-स्पोर्ट्स, शैक्षणिक खेल और सामाजिक खेल सहित ऑनलाइन खेल क्षेत्र को बढ़ावा देने, उसे विनियमित करने और इसके विकास तथा विनियमन के लिए एक प्राधिकरण की स्थापना का भी प्रावधान किया गया है.
इसके अलावा विधेयक में किसी कंप्यूटर, मोबाइल उपकरण या इंटरनेट के माध्यम से ऑनलाइन मनी गेम के प्रस्ताव, संचालन, सरलीकरण, विज्ञापन, प्रचार और भागीदारी को निषिद्ध किया गया है.
उत्तराखंड हाई कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस लोकपाल सिंह की माने तो सरकार द्वारा लाए गए कानून के बाद विदेशी कंपनियां भारत में ऑनलाइन गेमिंग का संचालन नहीं कर सकती है.
उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह कि चीजों पर लगाम लगनी चाहिए, ताकि समाज और युवा पीढ़ी इसके गिरफ्त में न आ जाए.
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-भारत एक्सप्रेस
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