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मुमताज का जन्मदिन- मीना कुमारी का दिया बंगला, बचपन की यादें और करियर छोड़ने की कहानी

31 जुलाई को मुमताज ने अपने जन्मदिन पर खास बातचीत में बचपन की यादें, मीना कुमारी से जुड़ी एक इमोशनल कहानी और एक्टिंग छोड़ने के पीछे की वजह साझा की.

हिंदी सिनेमा की सदाबहार और खूबसूरत अदाकारा मुमताज ने 31 जुलाई को अपना जन्मदिन मनाया. इस खास मौके पर उन्होंने अपने बचपन, करियर और जीवन के कुछ अनसुने पहलुओं को साझा किया. मुमताज ने बताया कि कैसे उनके लिए त्योहार और जन्मदिन का जश्न बचपन से ही बेहद खास रहा है, और कैसे उन्होंने मीना कुमारी से मोहब्बत से मिला बंगला स्वीकार किया.

 बचपन की दिवाली और बर्थडे की यादें

मुमताज ने बताया कि वे ईरानी परिवार से हैं और मुंबई में ही पली-बढ़ीं. उनके बचपन में बर्थडे का मतलब होता था- चॉकलेट, केक, दोस्तों को बुलाकर पार्टी और ढेर सारे गिफ्ट्स. यह परंपरा आज भी कायम है. दिवाली पर उन्हें दो-तीन टोकरी पटाखे मिलते थे और मां विशेष तौर पर आया और ड्राइवर को ताकीद करती थीं कि बच्ची का ध्यान रखा जाए.

उन्होंने बताया कि पहले वे वालकेश्वर में लता मंगेशकर के पड़ोस में रहा करती थीं, फिर मरीन ड्राइव के गोविंद महल में शिफ्ट हुईं, जहां संगीतकार जयकिशन का घर था. वहां भी वे नौकरों के साथ मिलकर पटाखे फोड़ा करती थीं.

दिल से दिया बंगला

मुमताज ने बताया कि मीना कुमारी ने फिल्म ‘गोमती के किनारे’ को प्रोड्यूस किया था, जिसमें मुमताज को 7.5 लाख रुपये  फीस तय की गई थी. फिल्म बनने के बाद मीना कुमारी की तबीयत बिगड़ गई और वे 5 लाख रुपये वापस नहीं कर पाईं. मुमताज ने पैसे माफ करने को कहा, लेकिन मीना कुमारी ने मोहब्बत से कहा, ‘बेटा, तुम बंगला ले लो.’

इस अपनापन और आत्मीयता से भरी पेशकश को मुमताज ने स्वीकार किया. यह बंगला राजेश खन्ना के बंगले के सामने था. हालांकि बाद में राजेश खन्ना ने वह बंगला बेच दिया और वहां बिल्डिंग बन गई.

 11 साल की उम्र से शुरू किया करियर

मुमताज ने महज 11 साल की उम्र में फिल्म ‘लाजवंती’  (1958) से अपने करियर की शुरुआत की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने ‘सोने की चिड़िया’, ‘स्त्री’ और ‘सेहरा’ जैसी फिल्मों में छोटे रोल किए. फिर उन्हें लीड रोल और पहचान मिली ‘राम और श्याम’, ‘ब्रह्मचारी’, जैसी फिल्मों से.

पीक पर छोड़ा फिल्मी करियर

लगभग 100 फिल्मों में काम करने वाली मुमताज ने अपने करियर के चरम पर फिल्मों को अलविदा कह दिया. 1974 में उन्होंने बिजनेसमैन मयूर माधवानी से शादी कर ली. मुमताज ने बताया कि उनके ससुराल वालों को पसंद नहीं था कि शादी के बाद वे फिल्मों में काम करें. उस वक्त वे सबसे ज्यादा फीस लेने वाली अभिनेत्रियों में से एक थीं.

मुमताज ने कहा, ‘मैं उस समय 7.5 लाख रुपये प्रति फिल्म लेती थी. लेकिन जब मेरे पति के परिवार ने कहा कि अब काम नहीं कर सकती, तो मैंने काम छोड़ दिया.’

1990 में मुमताज ने फिल्म ‘आंधिया’ से कमबैक करने की कोशिश की, लेकिन फिल्म बॉक्स ऑफिस पर असफल रही. इसके बाद उन्होंने फिल्मी दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया.


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