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‘विद्वानों का सम्मान है, लेकिन व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी का ज्ञान मंजूर नहीं’- जस्टिस नागरत्ना

सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के मामले में सुनवाई के दौरान जस्टिस बीवी नागरत्ना ने टिप्पणी की कि वह सभी बड़े लेखकों और विचारकों की राय का सम्मान करते हैं, लेकिन व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी से मिली जानकारी को स्वीकार नहीं कर सकते.

Justice BV Nagarathna

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सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के मामले में सुनवाई के दौरान जस्टिस बीवी नागरत्ना ने अहम टिप्पणी की है. जस्टिस नागरत्ना ने टिप्पणी करते हुए कहा कि वह सभी बड़े लेखकों और विचारकों की राय का सम्मान करते है, लेकिन व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी से मिली जानकारी को स्वीकार नहीं कर सकता.

मामले की सुनवाई के दौरान दाउदी बोहरा समुदाय के प्रमुख की ओर से पेश वरिष्ठ वकील नीरज किशन कौल ने कहा कि कांग्रेस नेता और लेखक शशि थरूर के एक लेख का हवाला दिया. इस लेख में धार्मिक मामलों और राहत के विषय मे न्यायिक संयम की बात कही गई थी. प्रतिष्ठित व्यक्तियों, विधिवेत्ताओं आदि का सम्मान करते हैं, लेकिन व्यक्तिगत राय, व्यक्तिगत राय ही होती है. इसपर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि अदालत सभी विद्वानों और लेखकों का.सम्मान करती है, लेकिन कोई भी लेख अंततः व्यक्तिगत राय होता है और वह अदालत पर बाध्यकारी नही हो सकता.

सीजेआई की टिप्पणी का जवाब देते हुए कौल ने कहा कि ज्ञान किसी भी देश, विश्व विद्यालय या स्रोत से आए, उसे स्वीकार किया जाना चाहिए. उन्होंने दलील दी कि भारतीय सभ्यता इतनी प्राचीन और समृद्ध है कि उसने हमेशा हर तरह के ज्ञान और विचारों को आत्मसात किया है.

सभी स्रोतों से ज्ञान ग्रहण करने पर जोर

वरिष्ठ वकील संजय किशन कौल ने कहा कि सभी स्रोतों से जानकारी लेने में कोई बुराई नहीं है. उन्होंने कहा कि अगर ज्ञान और बुद्धिमत्ता किसी भी स्रोत, किसी भी देश, किसी भी विश्व विद्यालय से आती है तो उसका स्वागत होना चाहिए. हमारी सभ्यता इतनी समृद्ध है कि हम हर प्रकार के ज्ञान और सूचना को स्वीकार कर सकते है. इसपर जस्टिस नागरत्ना ने हल्के फुल्के अंदाज में कहा, लेकिन व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी से नहीं. कौल ने कहा कि अनुच्छेद 26 (ख) के तहत किसी धार्मिक संप्रदाय के अधिकारियों को सभी संदर्भो में अनुच्छेद 25 (2) (ख) के अनुसरण में राज्य द्वारा अपनाए गए सामाजिक सुधार कानूनों के अधीन नहीं माना जा सकता.

उन्होंने कहा कि देवरु फैसले में यह सामान्य नियम नहीं दिया गया है कि अनुच्छेद 26 (घ) सभी संदर्भो में अनुच्छेद 25 (2)(ख) के अधीन हो, जैसा कि यह मामला केवल मंदिर प्रवेश के संदर्भ में था.

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-भारत एक्सप्रेस



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