सुप्रीम कोर्ट ने नवी मुंबई हवाई अड्डे का नाम बदलकर दिनकर बालू पाटिल हवाई अड्डा रखने की मांग को खारिज कर दिया है. दायर याचिका में केंद्र सरकार को महाराष्ट्र सरकार के उस प्रस्ताव पर समयबद्ध फैसला लेने का निर्देश देने की मांग की गई थी, जिसमें नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम बदलने की बात कही गई थी.
सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या की पीठ ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में आपके पास उपाय मौजूद हैं, कृपया उनका पालन करें. सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि अपनी मांगों को लगातार उठाते रहे, अंततः वे पूरी हो जाएंगी. सीजेआई ने कहा एक अदालत के रूप में हम कैसे हस्तक्षेप कर सकते है? अन्यथा यह नीति निर्माण होगा, सभी को शांतिपूर्ण विरोध करने का अधिकार है. लेकिन सड़को पर उतर कर आम आदमी के लिए यह समस्या पैदा करने के लिए नही है. कोर्ट ने हाई कोर्ट द्वारा दिए गए 4 नवंबर 2025 को दिए गए आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि यह नीति निर्माण का विषय है, इसमें अदालत जैसे हस्तक्षेप कर सकती है. कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता सक्षम प्राधिकरण के पास अपनी मांगों को रख सकते है.
सार्वजनिक स्थानों पर बाधा उत्पन्न करना कानून का उल्लंघन माना जाएगा
सीजेआई ने कहा कि उन्हें धमकी नहीं देनी चाहिए और कानून व्यवस्था की समस्या पैदा नहीं करनी चाहिए. हर व्यक्ति को शांतिपूर्ण और कानूनी तरीके से विरोध प्रदर्शनी करने का अधिकार है. कानून के तहत जो अनुमति है, वह किया जा सकता है. लेकिन सड़कों पर आकर आम लोगों के लिए परेशानी पैदा नहीं करनी चाहिए. यह विवाद निर्माणधीन नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम बदलकर लोकनेता डी. बी पाटिल नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट करने के महाराष्ट्र सरकार के प्रस्ताव से जुड़ा है.
याचिकाकर्ता ने पहले बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया था, लेकिन नवंबर 2025 में हाई कोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया. हाई कोर्ट के इसी फैसले को चुनौती देते हुए प्रकाशझोत सामाजिक संस्था नामक एक संगठन ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.
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-भारत एक्सप्रेस
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