Mumbai Train Blast Case: सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2006 के मुंबई ट्रेन ब्लास्ट मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दिया है. साथ ही कोर्ट ने बरी किए गए सभी आरोपियों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है.
जस्टिस एम. एम सुंदरेश की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि हाई कोर्ट के फैसले को मिशाल के तौर पर नही देखा जा सकता है. महाराष्ट्र सरकार ने हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ याचिका दायर की है, जिसपर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है.
मामले की सुनवाई के दौरान महाराष्ट्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य बरी किए गए आरोपियों को फिर से जेल भेजना नही है, बल्कि चिंता इस बात की है कि लंबित मकोका मामले में इस फैसले का प्रभाव डाल सकता है.
जस्टिस सुंदरेश ने टिप्पणी करते हुए कहा कि कुछ आरोपी पाकिस्तानी नागरिक है, जिससे इसकी गंभीरता और अंतरराष्ट्रीय पहलू के संकेत मिलता है.
मुंबई ब्लास्ट केस में न्यायालय ने साक्ष्यों को बताया ‘अपर्याप्त’
बता दें कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने विशेष टाडा न्यायालय द्वारा दोषी ठहराए गए सभी 12 आरोपियों को बरी कर दिया है. इनमें से 5 को पहले मौत की सजा सुनाई गई थी, जबकि 7 को उम्रकैद मिली थी.
बॉम्बे हाईकोर्ट ने 19 साल बाद इस मामले में अपना फैसला सुनाया है. हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यह मानना मुश्किल है कि आरोपियों ने अपराध किया है, इसलिए उन्हें बरी किया जाता है. अगर वे किसी दूसरे मामले में वांटेड नहीं है तो उन्हें तुरंत रिहा किया जाए.
वहीं ट्रेनों के प्रथम श्रेणी डिब्बों में हुए इन विस्फोटों के बाद एटीएस ने इन विस्फोटों के बाद ये विस्फोट प्रेशर कुकर बम से करवाए जाने की बात कही थी.
जिसपर कोर्ट ने आने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष अपराध में प्रयुक्त बमों के प्रकार को रिकॉर्ड में लाने में भी विफल रहा है, कोर्ट ने कहा कि जो साक्ष्य अदालत में दिए गए वह आरोपियों को दोषी ठहराने के लिए काफी नही है.
ज्ञात हो कि 2006 के मुंबई ट्रेन ब्लास्ट में 187 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 800 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे.
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-भारत एक्सप्रेस
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