सांकेतिक तस्वीर.
दिल्ली हाईकोर्ट ने टिप्पणीकार अभिजीत अय्यर मित्रा के खिलाफ नौ महिला पत्रकारों की मानहानि याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हें समन जारी किया है. कोर्ट ने मित्रा से अभिव्यक्ति की आजादी का उपयोग करते समय ‘लक्ष्मण रेखा’ का ध्यान रखने की सख्त हिदायत दी है. जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव की एकल पीठ ने मित्रा से इस मामले में उनकी लिखित दलीलें दाखिल करने को कहा है और एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर की गई टिप्पणियों पर उनका स्पष्ट रुख जानना चाहा है.
‘न्यूजलॉन्ड्री’ की महिला पत्रकारों ने लगाए गंभीर आरोप
मीडिया हाउस न्यूजलॉन्ड्री से जुड़ी नौ महिला पत्रकारों ने याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि अभिजीत अय्यर मित्रा ने सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ झूठे, अपमानजनक, दुर्भावनापूर्ण और निराधार आरोप लगाए और उनके लिए आपत्तिजनक शब्दों व गालियों का इस्तेमाल किया.
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की कि मित्रा ने अदालत की मौखिक टिप्पणियों के बाद कथित आपत्तिजनक पोस्ट हटा दिए हैं, लेकिन याचिकाकर्ताओं की ओर से मांग की गई है कि भविष्य में ऐसे कृत्य से रोकने के लिए उन्हें संयम बरतने का निर्देश दिया जाए. कोर्ट ने कहा, “हम आपको बोलने से नहीं रोक रहे हैं, लेकिन ये समझना जरूरी है कि लक्ष्मण रेखा कहां है. अगर अभिव्यक्ति की आज़ादी अपमानजनक बनती है, तो याचिकाकर्ताओं को कोर्ट आने की आज़ादी होगी.”
दो करोड़ रुपये का हर्जाना और माफी की मांग
याचिकाकर्ताओं की ओर से वकील बानी दीक्षित और फरमान अली ने दलील दी कि अभिजीत मित्रा ने अब तक अपनी पोस्ट के लिए कोई पछतावा नहीं जताया है. वहीं मित्रा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पर्सीवल बिलिमोरिया ने कोर्ट को बताया कि पोस्ट अपमानजनक नहीं थी, फिर भी कोर्ट की टिप्पणी का सम्मान करते हुए उसे हटा दिया गया है. उन्होंने कोर्ट से मुकदमा खारिज करने की मांग की और न्यूजलॉन्ड्री के खिलाफ जांच के आदेश की भी अपील की. इस पर कोर्ट ने कहा कि इसके लिए अलग से कानूनी कदम उठाना होगा.
महिला पत्रकारों ने याचिका में मित्रा को भविष्य में ऐसे पोस्ट करने से रोकने, लिखित माफी मंगवाने और ₹2 करोड़ रुपये हर्जाने की मांग की है. अदालत अब इस मामले में अगली सुनवाई में मित्रा की लिखित प्रतिक्रिया के बाद आगे की कार्यवाही करेगी.
-भारत एक्सप्रेस
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