केंद्र सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में दो वरिष्ठ वकीलों की नियुक्ति की मंजूरी दे दी है. जिन दो वरिष्ठ वकीलों को न्यायाधीश बनाया गया है उनमें अभिताभ कुमार राय और राजीव लोचन शुक्ला शामिल है.
इसकी जानकारी केंद्रीय विधि और न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने अपने आधिकारिक X अकाउंट से साझा की है.
कॉलेजियम ने 12 वकीलों की करी सिफारिश
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट के लिए 12 वकीलों और 14 न्यायिक अधिकारियों के नामों की सिफारिश की है. इनमें से तीन वरिष्ठ वकील गरिमा प्रसाद, स्वरूपमा चौधरी और अभदेश कुमार चौधरी सुप्रीम कोर्ट में प्रेक्टिश करते है.
हालही में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में 26 नए जजों की नियुक्ति की सिफारिश की थी. पांच सदस्यीय कॉलेजियम में सीजेआई बी आर गवई, जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस जे के महेश्वरी और जस्टिस बीवी नागरत्ना शामिल है. इसी सप्ताह कॉलेजियम ने 33 उम्मीदवारों को बुलाया था, जिसमें 20 न्यायिक अधिकारी और 13 वकील शामिल हैं.
इलाहाबाद हाईकोर्ट में न्यायाधीशों के लिए कुल 160 पद स्वीकृत हैं, फिलहाल इलाहाबाद हाईकोर्ट में 84 जज कार्यरत हैं.
लंबित मुकदमों की स्थिति बेहद चिंताजनक
बता दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित मुकदमों की स्थिति बेहद चिंताजनक है. इलाहाबाद हाईकोर्ट में कुल 11,55,225 मामले लंबित हैं. राज्य की 24 करोड़ आबादी के मुकाबले हाई कोर्ट में हर 30 लाख लोगों पर महज एक जज है, और औसतन एक-एक जज के पास 14, 623 लंबित मुकदमे है.
हालही में एक मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने लंबित मामलों को देखते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था और समयबद्ध तरीके से जजों की नियुक्ति पर जोर दिया था. दरअसल जजों की नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 217 और 224 में लिखित एक जटिल प्रक्रिया के तहत की जाती है.
इसमें राज्य सरकार के परामर्श के बाद हाई कोर्ट के दो वरिष्ठतम जज द्वारा एक सूची तैयार की जाती है. इसके बाद सिफारिशों को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम को भेजा जाता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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