दिल्ली हाई कोर्ट ने अंकिता भंडारी हत्याकांड मामले में भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री व उत्तराखंड प्रभारी दुष्यंत गौतम को बड़ी राहत मिली है. कोर्ट दुष्यंत गौतम की ओर से दायर मानहानि याचिका पर कांग्रेस, आप, उर्मिल सनावर सहित अन्य को समन जारी किया है.
2 करोड़ का हर्जाना
कोर्ट ने कांग्रेस, आप, उर्मिल सनावर सहित 9 लोगों से यूट्यूब, इंस्टाग्राम, फेसबुक और X जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपलोड किए गए विभिन्न पोस्ट और वीडियो हटाने का निर्देश दिया है. जस्टिस मिनी पुष्करणा ने अंकिता भंडारी हत्याकांड में दुष्यंत गौतम को वीआईपी बताकर नाम लेने या निशाना बनाने वाली किसी भी सामग्री पर रोक लगा दिया है. कोर्ट ने सभी पक्षो से चार सप्ताह में जवाब मांगा है. कोर्ट 4 मई को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा.
मामले की सुनवाई के दौरान दुष्यंत गौतम की ओर से पेश वरिष्ठ वकील गौरव भाटिया ने कहा कि वह एक राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टी के नेता है. पूर्व सांसद है, उनके लाखों फॉलोअर्स है, उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुचाया गया है. उन्होंने 2 करोड़ रुपए का हर्जाना मांगा है. भाटिया ने कोर्ट को यह भी बताया कि गौतम पांच दशक से राजनीति में है और वर्तमान में राष्ट्रीय महासचिव है.
उर्मिला सनावर के खिलाफ 9 आपराधिक मामले
भाटिया ने हाई कोर्ट को बताया कि उर्मिला सनावर के खिलाफ 9 आपराधिक मामले दर्ज है. भाटिया ने कहा कि हमने अपनी याचिका में उर्मिला सनावर को प्रतिवादी 1 जबकि कांग्रेस पार्टी को प्रतिवादी 3 बनाया है. उन्होंने कहा कि 10 हजार फॉलोअर्स वाला एक व्यक्ति भी नुकसान पहुचा सकता है, लेकिन उससे होने वाला नुकसान उतना नहीं होता जितना कि लाखों फॉलोअर्स.
भाटिया ने ये भी कहा कि यह सोशल मीडिया कि दुनिया है. एक घंटे में लाखों व्यूज हो जाते हैं. उन्होंने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस प्रेस कॉन्फ्रेंस करती है और फिर उसे अपने फेसबुक और यूट्यूब चैनलों पर शेयर करती है. उनके इंस्टाग्राम पर तो सिर्फ 11.4 मिलियन फॉलोअर्स हैं.
वीआईपी की कोई भूमिका नहीं
दायर याचिका में कहा गया है कि अंकिता भंडारी प्रकरण में उनका नाम बिना किसी जांच, सबूत या न्यायिक आधार के घसीटा जा रहा है, जबकि उत्तराखंड पुलिस और एसआईटी पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि इस मामले में किसी भी वीआईपी की कोई भूमिका नहीं थी. दुष्यंत कुमार गौतम ने पूर्व विधायक सुरेश राठौर और उर्मिला सानवार के खिलाफ थाना डालनवाला में एफआईआर दर्ज कराई है. उन्होंने बीजेपी और खुद को बदनाम किए जाने का भी साजिद का आरोप लगाया है.
उम्रकैद की सजा
याचिका में यह भी कहा गया है कि कोर्ट वादी के पक्ष में स्थायी निषेधाज्ञा जारी करें, जिससे प्रतिवादियों और उनके एजेंटों, प्रतिनिधियों, सहयोगियों, वारिसों एवं रिश्तेदारों को वादी के विरुद्ध किसी भी प्रकार के मानहानिकारक आरोपों के प्रकाशन व प्रसार से रोका जा सके. अंकिता भंडारी, जो रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट थीं, की 2022 में हत्या कर दी गई थी.
जांच में पाया गया कि रिसॉर्ट मालिक पुलकित आर्य (पूर्व भाजपा नेता के बेटे) और उनके दो सहयोगियों ने अंकिता को यौन सेवाएं देने से इनकार करने के बाद नहर में धकेल दिया था. कोर्ट ने तीनों को उम्रकैद की सजा सुनाई है.
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-भारत एक्सप्रेस
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