Urdu Conclave 2026

सुप्रीम कोर्ट में बाबा रामदेव की याचिका, छत्तीसगढ़ और बिहार में दर्ज एफआईआर दिल्ली ट्रांसफर की मांग

योगगुरु और पतंजलि आयुर्वेद के संस्थापक बाबा रामदेव ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर छत्तीसगढ़ और बिहार में दर्ज एफआईआर को दिल्ली ट्रांसफर करने की मांग की है. याचिका उनके कथित बयानों से जुड़ी है, जिसमें उन्होंने कोविड दवाओं रेमडेसिविर और फेबिफ्लू की प्रभावशीलता पर सवाल उठाया था.

बाबा रामदेव.

योगगुरु और पतंजलि आयुर्वेद के संस्थापक बाबा रामदेव की ओर से दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि छत्तीसगढ़ में दर्ज मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दिया गया है. जस्टिस एम. एम सुंदरेश और जस्टिस एस. सी. शर्मा की पीठ सुनवाई कर रही है. बाबा रामदेव की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ दवे ने कोर्ट को बताया कि यह मामला रामदेव के उन बयानों से जुड़ा है, जिनमें उन्होंने रेमदेसिविर और फेबिफ्लू जैसी कोविड दवाओं की प्रभावशीलता पर सवाल उठाए थे, और इन्हें मरीजों की मौत से जोड़ा था. रामदेव ने खिलाफ बिहार और छत्तीसगढ़ में दर्ज दो एफआईआर दर्ज की गई है.

पिछली सुनवाई में कोर्ट में रोहतगी ने कहा था कि रामदेव द्वारा दवा बनाने के बाद तमाम डॉक्टर उनके खिलाफ हो गए. हालांकि उनका जो वीडियो वायरल हुआ वह सही नही था. रोहतगी ने कहा था कि बाबा रामदेव चाहते हैं कि तमाम एफआईआर को इकठ्ठा किया जाए और उनको दिल्ली ट्रांसफर किया जाए. उन्होंने कहा था कि स्वामी रामदेव एक पब्लिक फिगर है. वकील ने दावा किया था कि स्वामी रामदेव ने डॉक्टरों को लेकर कोई बयान नही दिया है.

पटना और रायपुर इकाई ने दर्ज कराई शिकायत

बता दें कि आईएमए की पटना और रायपुर इकाई ने योग गुरु बाबा रामदेव के खिलाफ शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया है कि कोविद 19 नियंत्रण प्रक्रिया में उनकी टिप्पणियों से पूर्वाग्रह की स्थिति उत्पन्न हो सकती है और यह लोगों को महामारी के खिलाफ उचित ईलाज के प्रति हतोत्साहित कर सकती है. बाबा रामदेव ने अपनी याचिका में पटना और रायपुर में दर्ज प्राथमिकताओं को दिल्ली ट्रांसफर करने की मांग की गई है. उनके खिलाफ IPC और आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है.

गौरतलब है कि बाबा रामदेव के कथित बयान से देश मे एलोपैथी बनाम आयुर्वेद को लेकर बहस शुरू हो गई थी. हालांकि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने टिप्पणी को अनुचित करार दिए जाने और पत्र लिखने के बाद रामदेव ने 23 मई को अपना बयान वापस ले लिया था. ज्ञात हो कि हालही में सुप्रीम कोर्ट ने बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण को गलती सुधारने के लिए एक हफ्ते का समय दिया है. कोर्ट ने बाबा रामदेव और बालकृष्ण को कहा था कि आप और आपके वकील सोच रहे है कि हमने माफ कर दिया है तो हमने माफ नही किया है. बाबा रामदेव कोर्ट से कई बार माफी मांग चुके है लेकिन कोर्ट ने अभी तक उन्हें माफ नही किया है.

आयुर्वेद बढ़ाने के लिए किसी को गलत नहीं कहा जा सकता- कोर्ट

कोर्ट ने कहा कि आपने अपने आयुर्वेद को बढ़ाने के लिए किसी को गलत नही कह सकते. रामदेव ने माना कि हमने जो कहा कि उसे नही कहना चाहिए था. वो मुझसे गलती हो गई है. भविष्य में आगे से ऐसी गलती नही होगी. रामदेव ने यह भी कहा कि उन्होंने जो भी कहा था वह आवेश और उत्साह में आकर कह दिया था. जस्टिस कोहली ने कहा कि लाइलाज बीमारी के इलाज का प्रचार नहीं कर सकते हैं. कोई भी पद्धति में नहीं किया जा सकता. यह ख्याल रखा जाना चाहिए था. गैर जिम्मेदाराना हरकत थी.

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-भारत एक्सप्रेस



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