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बांग्लादेशियों के नाम पर गिरफ्तार किए जा रहे प्रवासी मजदूरों के मामले की सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि कोर्ट को जंतर मंतर नही बनने देना चाहिए

बांग्लादेशियों के नाम पर गिरफ्तार किए जा रहे प्रवासी मजदूरों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस बागची व जस्टिस मनुभाई पंचोली की बेंच ने केंद्र सरकार से मांगा जवाब.

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सचिवों को सजा पूरी कर चुके कैदियों को रिहाई का दिया आदेश
Edited by Vaibhav Gupta

बांग्लादेशियों के नाम पर गिरफ्तार किए जा रहे प्रवासी मजदूरों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल मनुभाई पंचोली की बेंच ने केंद्र सरकार से एक सप्ताह में जवाब देने को कहा है.

मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि कोर्ट को जंतर मंतर नही बनने देना चाहिए. कोर्ट ने सरकार से यह बताने को कहा है कि अवैध प्रवासियों को वापस भेजने की क्या प्रक्रिया है.

प्रवासियों की वापसी के लिए क्या मानक कार्यप्रणाली

कोर्ट ने गृह मंत्रालय के पुश-बैक सर्कुलर पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि पंजाब और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों की सीमा पार राज्यों के साथ साझा संस्कृति और भाषा है, इसलिए केंद्र को यह बताना होगा कि इस तरह की परिस्थितियों में प्रवासियों की वापसी के लिए क्या मानक कार्यप्रणाली अपनाई जाती है.

कोर्ट ने गुजरात सरकार को भी इस मामले में पक्षकार बनाया है. इससे पहले ही कोर्ट नौ राज्यों को नोटिस जारी कर जवाब मांग चुका है. मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने कोर्ट को बताया किएक गर्भवती महिला को बांग्लादेश के अधिकारियों ने अपने विदेशी कानून के तहत यह कहकर गिरफ्तार कर लिया कि वह भारतीय है.

बंदी प्रत्यक्षीकरण को नहीं किया जा सकता स्थगित

जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि इसमें कई तथ्यात्मक मुद्दे शामिल हैं. हम समझते हैं कि बंदी प्रत्यक्षीकरण को स्थगित नहीं किया जा सकता. क्योंकि मामला कोर्ट ने लंबित है, हम हाई कोर्ट से इस मामले पर विचार करने का अनुरोध करेंगे. भूषण ने कहा कि कोई भी अधिकारी किसी को इस तरह कैसे देश से बाहर निकाल सकता है?

गैर-नागरिक को नहीं भेज सकते दूसरे देश

जस्टिस सूर्यकांत ने आगे कहा कि ऐसा आदेश कैसे पारित किया जाए, जी प्रकृति में ही अस्पष्ट हो? भूषण ने कहा कि कोई भी अधिकारी किसी व्यक्ति को कोई ट्रिब्यूनल आदि द्वारा गैर-नागरिक घोषित किए बिना दूसरे देश में नहीं भेज सकता. यह याचिका पश्चिम बंगाल प्रवासी श्रमिक कल्याण बोर्ड की ओर से याचिका दायर की गई है. साथ ही याचिका में बंगाली प्रवासी श्रमिकों को कथित तौर पर हिरासत में लेने और बांग्लादेश वापस भेजने के फैसले को चुनौती दी गई है.

कोर्ट पहले ही केंद्र सरकार सहित दिल्ली, ओडिशा, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, हरियाणा और पश्चिम बंगाल से जवाब मांग चुका है. मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने कहा था सत्यापन से पता चलता है कि वे भारतीय नागरिक है.

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-भारत एक्सप्रेस



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