Banke Bihari Corridor: वृंदावन के प्रसिद्ध श्री बांके बिहारी मंदिर के प्रस्तावित कॉरिडोर को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लाए गए अध्यादेश 2025 को चुनौती देने वाली याचिका पर सीजेआई बीआर गवई तय करेंगे कि इस मामले की सुनवाई कब की जाए. यह याचिका श्री बांके बिहारी ट्रस्ट जी की ओर से दायर की गई है.
दायर याचिका में अध्यादेश को संवैधानिकता को चुनौती दी गई है. दायर याचिका में कहा गया है कि 350 सदस्यों वाली मंदिर प्रबंधन समिति और सेवायत रजत गोस्वामी ने कहा कि जब एक संबंधित मामला अभी भी इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित है तो अध्यायदेश लेकर राज्य सरकार ने दुर्भावनापूर्ण करवाई की है.
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि वे इस तरह मंदिर प्रशासन पर कब्जा कर रहे है. अध्यादेश सब कुछ अपने हाथ में ले लेता है. हेरा फेरी का कोई आरोप नही है.
कोर्ट का सवाल: कितने मंदिरों का प्रबंधन विधायी आदेश से सरकार के हाथ में?
जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि यह दान वगैरह का मामला है. आप एक बार वहां जाए, बाकी सब पता चल जाएगा. यह उस इलाके के विकास के लिए, जहां लाखों तीर्थयात्री आते है. कोर्ट ने कहा कि वह भी एडहॉक है. कृपया पूरे भारत में पता लगाएं कि कितने मंदिरों का प्रबंधन विधायी आदेश द्वारा अपने हाथ मे लिया गया है.
जस्टिस सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता के वकील कपिल सिब्बल से पूछा कि आप हाई कोर्ट क्यों नही गए? इसपर सिब्बल ने कहा कि मंदिर के पास 300 करोड़ रुपए की संपत्ति है और राज्य सरकार ने एक पुनर्विकास योजना बनाई. सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर को पक्ष बनाये बिना ही एक आदेश पारित किया था.
सिब्बल ने कहा कि उस मामले में सुनवाई कल सूचीबद्ध है और यह अध्यादेश उसी संदर्भ में है. इसपर जस्टिस सूर्यकांत ने सुझाव दिया कि वो परसो इस मामले को सुन सकते है. इस पर सिब्बल ने कहा कि कोई आपत्ति नहीं है, मैं कल मुख्य न्यायाधीश के समक्ष इसका उल्लेख कर दूंगा. दोनों मामलों की एक सुनवाई होनी चाहिए, जैसा कि कोर्ट ने कहा था कि अध्यादेश पेश किया जाए और हम उसका परीक्षण करेंगे.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, दर्शन में बाधा न हो, ट्रस्ट के अधीन ही रहेगा मंदिर कोष
इससे पहले दायर याचिका पर कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि यह पूरी तरह ब्रेक डाउन जैसा है. मामले की सुनवाई के दौरान यूपी सरकार की ओर से पेश वकील सार्थक चतुर्वेदी ने यह स्पष्ट किया था कि मंदिर का समस्त कोष ट्रस्ट के अधीन है और राज्य सरकार का इसमें कोई अधिकार नही है.
वकील चतुर्वेदी ने कोर्ट को बताया था कि अध्यादेश की धारा 5 और 7 में स्पष्ट प्रावधान है कि बोर्ड और ट्रस्टी ही मंदिर प्रबंधन का निर्णय लेंगे. यह मंदिर के बेहतर प्रबंधन के लिए पहला अध्यादेश है, जिसकी प्रति अदालत और याचिकाकर्ताओं को सौंपी गई है.
सुप्रीम कोर्ट देवेंद्र नाथ गोस्वामी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा है. वृंदावन में वर्तमान बांकेबिहारी मंदिर की 5.65 एकड़ परिधि में ठाकुर श्री बांकेबिहारी कॉरिडोर बनना प्रस्तावित है.
कॉरिडोर तैयार होने के दौरान भक्तों की समस्याओं के मुद्दे पर कोर्ट ने कहा था कि हम यह स्पष्ट करते हैं कि योजना के कार्यान्वयन को छोड़कर भक्तों के दर्शन में किसी भी तरह से बाधा नही डाली जाएगी.
दरअसल 2022 में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर मंगला आरती के दौरान भीड़ के भगदड़ में फंसकर दो श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी और कई की घायल हो गए थे. तब सरकार ने पांच एकड़ भूमि गलियारा बनाने का प्रस्ताव दिया था.
ये भी पढ़ें- OBC आरक्षण के मामले में ममता सरकार को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल राहत, कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले पर लगाई अंतरिम रोक
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.


