बीजेपी नेता योगेंद्र चंदोलिया को राऊज एवेन्यू कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट नेहा मित्तल ने चंदोलिया को उन पर लगे सभी आरोपों से मुक्त कर दिया है. 24 अप्रैल को हाई कोर्ट ने निचली अदालत को आरोपी के खिलाफ आरोप तय करने पर नए सिरे से विचार करने को कहा था.
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला और आरोप मुक्त
दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के ‘देवेंद्र कुमार बनाम दिल्ली सरकार’ फैसले के मद्देनजर आरोपी के खिलाफ आरोप तय करने पर विचार किया जाए. उसके बाद कोर्ट ने आरोप तय करने पर नए सिरे से सुनवाई करते हुए चंदोलिया को आरोप मुक्त किया है. 18 अक्टूबर 2025 को सेशंस कोर्ट ने इस मामले में मजिस्ट्रेट कोर्ट की ओर से आरोप तय करने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया था. सेशंस कोर्ट के आदेश को चंदोलिया ने दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसने आरोप तय करने पर दोबारा विचार करने का आदेश दिया था.
सांसद बनने के बाद केस हुआ था ट्रांसफर
बीजेपी नेता चंदोलिया पर सरकारी कर्मचारी पर हमला करने का आरोप है. इस मामले में उनके खिलाफ वर्ष 2020 में प्रसाद नगर थाने में पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी. यह मामला पहले दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में चल रहा था, लेकिन योगेंद्र चंदोलिया के सांसद बनने के बाद इसे राऊज एवेन्यू कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया था.
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दिल्ली पुलिस की चार्जशीट और धाराएं
दिल्ली पुलिस ने आईपीसी की धारा 188, 269, 147, 148, 149, 427 और सार्वजनिक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम की धारा 3, महामारी अधिनियम की धारा 3 के तहत आरोप पत्र दायर किया था. कोर्ट ने दाखिल सप्लीमेंट्री चार्जशीट पर संज्ञान लिया था. तीस हजारी कोर्ट ने 17 अक्टूबर 2023 को चार्जशीट पर संज्ञान लेते हुए आरोपियों को समन जारी किया था.
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