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कावेरी जल विवाद मामले में कर्नाटक सरकार का जवाब, सुप्रीम कोर्ट 17 अगस्त को करेगा सुनवाई

कावेरी जल विवाद पर सुप्रीम कोर्ट 17 अगस्त को सुनवाई करेगा. कर्नाटक ने अदालत में जवाब दाखिल कर तमिलनाडु की याचिका को निरर्थक बताते हुए खारिज करने की मांग की है.

Cauvery Water Dispute Supreme Court Hearing On August 17 Karnataka Reply
Edited by Vaibhav Gupta

Cauvery Water Dispute: कावेरी जल विवाद मामले में तमिलनाडु सरकार की ओर से दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 17 अगस्त को सुनवाई करेगा. वही कर्नाटक सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल कर तमिलनाडु सरकार के आरोपों को गलत बताते हुए याचिका खारिज करने की मांग की है.

सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच तमिलनाडू सरकार की याचिका पर सुनवाई कर रही है. कर्नाटक ने तमिलनाडू सरकार और डीएमके की पानी छोड़ने की मांग वाली याचिकाओं का विरोध किया है.

कर्नाटक सरकार का क्या है कहना?

कर्नाटक सरकार के मुताबिक CWMA ने 30 जुलाई को 15 दिनों तक रोजाना 3500 क्यूसेक पानी छोड़ने का आदेश दिया था. कर्नाटक सरकार ने कहा है कि 29 जुलाई से 10 अगस्त के बीच जलाशयों से 1,64,080 क्यूसेक पानी छोड़ा गया. कर्नाटक के अनुसार 86, 797 क्यूसेक पानी बिलिगुंदुलु गेजिंग स्टेशन तक पहुंचा.

सरकार ने यह भी कहा है कि CWMA के आदेश का पूरी तरह पालन हो चुका है. लिहाजा तमिलनाडु सरकार की मांग निरर्थक है. कर्नाटक सरकार ने तमिलनाडू सरकार की मांग को खारिज करने की मांग की है.

नहीं मिला कावेरी नदी का उचित हिस्सा

पिछली सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से पेश वकील ने कहा कि कम बारिश वाले साल में तमिलनाडु को कावेरी नदी के पानी का उचिता हिस्सा नहीं मिल रहा है. दायर याचिका में कर्नाटक सरकार को कावेरी नदी का निर्धारित जल छोड़ने का निर्देश देने की मांग की गई है.

दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि कर्नाटक ने कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण और कावेरी जल विनियमन समिति के आदेशों का पालन नही किया है. डीएमके की ओर से दायर याचिका में कहा कि कर्नाटक राज्य को निर्देश दिया जाए कि वह सीडब्ल्यूआरसी (CWRC) के 28 जुलाई 2026 के निर्देश को तुरंत और पूरी तरह से लागू करें.

क्या है मामला?

कावेरी जल विनियमन ने 28 जुलाई को कावेरी बेसिन की जलवैज्ञानिक और मौसम संबंधी स्थितियों का आकलन करने के बाद कर्नाटक को निर्देश दिया था कि वह कृष्ण राजा सागर और काबिनी जलाशयों से पानी छोड़कर 29 जुलाई से 12 अगस्त 2026 तक बिलिगुंडलू में 3500 क्यूसेक जल की निकासी सुनिश्चित सीडब्ल्यूआरसी की 54वीं आपातकालीन बैठक में मंजूरी मिली थी.

वहीं, कावेरी नदी के पानी को लेकर तमिलनाडु में किसानों का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है. किसान नेता अय्या कन्नू के नेतृत्व में किसानों ने तिरुचिरापल्ली में कावेरी नदी के किनारे रेत में खुद को दबाकर अनोखा प्रदर्शन किया.

बता दें कि 2018 में केंद्र ने तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल और पुडुचेरी के बीच नदी के पानी के बंटवारे के विवाद को सुलझाने के लिए कावेरी वाटर मैनेजमेंट ऑथोरिटी बनाई थी. नदी किनारे बसे राज्य के.सदस्यों के अलावा बोर्ड में केंद्र का एक नॉमिनी भी होता है.

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-भारत एक्सप्रेस



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