CBSE Board Exam Evaluation: सीबीएसई बोर्ड परीक्षाओं की मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान सीबीएसई की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि लगभग 1.68 लाख छात्रों ने शिकायत निवारण विंडो के जरिए सीबीएसई से संपर्क किया और उत्तर पुस्तिकाओं में दोबारा मूल्यांकन करवाया.
हलफनामा दाखिल करने का समय दिया
सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने एसजी मेहता को हलफनामा दाखिल करने का समय दे दिया है. कोर्ट 25 अगस्त को मामले में अगली सुनवाई करेगा. मामले की सुनवाई के दौरान एसजी मेहता ने कहा कि हमने एक नोट तैयार किया है, लेकिन मुझे लगता है कि इसे हलफनामे के तौर पर पेश किया जाना चाहिए. सीजेआई सूर्यकांत ने एसजी मेहता से पूछा कि क्या कोई स्थायी व्यवस्था है क्या? जबकि याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि कुछ छात्रों ने प्रवेश परीक्षाएं तो पास कर ली हैं, लेकिन वे सीबीएसई में जरूरी न्यूनतम अंक हासिल नहीं कर पाए हैं.
कोर्ट दायर याचिका पर सुनवाई कर रही
वह मामला अभी भी लंबित है. इसपर एसजी मेहता ने कहा कि मैं विद्वान साथी से इस पर ध्यान देने का अनुरोध करूंगा, क्योंकि इससे बड़ी संख्या में छात्र प्रभावित हो रहे है. मेहता ने कहा कि यह मामला दूसरी परीक्षाओं से जुड़ा है, जिनके आधार पर इन मार्क्स पर विचार किया जाना है. उन परीक्षाओं को टाला नहीं जा सकता. हम आईआईटी वगैरह की परीक्षाओं को नहीं टाल सकते. कोर्ट सीबीएसई बोर्ड परीक्षाओं में ओएसएम मूल्यांकन प्रणाली को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है.
मूल्यांकन को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए नियम तय करने की मांग
दायर याचिका में बोर्ड परीक्षाओं के मूल्यांकन को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए नियम तय करने की मांग की गई थी. इसी बीच सीजेआई सूर्यकांत ने बेहद सख्त लहजे में सीबीएसई से कहा, ‘जरा इन छोटे बच्चों की निराशा को देखिए’ कोर्ट का इशारा उस तनाव का डर का था जो गलत मूल्यांकन के कारण स्कूली बच्चों को झेलना पड़ता है. सीजेआई ने संकेत दिया है कि परीक्षा और मूल्यांकन प्रणाली से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है. जस्टिस बागची ने कहा कि व्यवस्था में कुछ ऐसी समस्याएं उभर रही हैं, जिन्हें दूर करने के लिए अदालत संबंधित अधिकारियों का सहयोग चाहती है.
मूल्यांकन प्रणाली में बदलाव की मांग पर समिति विचार
उन्होंने स्पष्ट किया कि अदालत का उद्देश्य किसी के खिलाफ कार्रवाई करना नहीं, बल्कि समाधान तलाशना है. पिछली सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि इन मुद्दों की समीक्षा के लिए पूर्व वरिष्ठ नौकरशाह एस. राधा चौहान की अध्यक्षता में एक सदस्यीय समिति गठित की गई है. उन्होंने यह भी कहा था कि व्यक्तिगत मार्कशीट से जुड़ा विवाद पहले ही सुलझाया जा चुका है, जबकि मूल्यांकन प्रणाली में बदलाव की मांग पर समिति विचार कर रही हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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