Bharat Express DD Free Dish
Kanya Sumangla Mission Shakti Digital
Kanya Sumangla Mission Shakti Digital

CEC ज्ञानेश कुमार के फैसलों पर उठे सवाल, सुप्रीम कोर्ट अगले हफ्ते करेगा सुनवाई

CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर याचिका में ECI के फैसलों में कथित एकतरफा निर्णय प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं. सुप्रीम कोर्ट अगले हफ्ते मामले पर सुनवाई करेगा.

CEC Gyanesh Kumar

Gyanesh Kumar Supreme Court: चुनाव आयोग में फैसले लेने के तरीके को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक नई याचिका पहुंची है. इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के अकेले फैसले लेने के तरीके पर सवाल उठाए गए हैं. सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार, 29 सितंबर को इस मामले पर सुनवाई के लिए सहमति दे दी. मामले की सुनवाई अगले हफ्ते होने की उम्मीद है.

यह याचिका चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत के सामने सीनियर वकील विकास सिंह ने रखी. उन्होंने अदालत से इस मामले को जल्द सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का आग्रह किया. इस पर सीजेआई ने कहा कि याचिका को अगले हफ्ते लिस्ट किया जाए.

याचिका में क्या कहा गया?

याचिकाकर्ता का मुख्य सवाल यह है कि क्या चुनाव आयोग को संविधान के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल अकेले सीईसी कर सकते हैं या इसके लिए आयोग के सभी सदस्यों की सामूहिक भागीदारी जरूरी है. याचिका में संविधान के अनुच्छेद 324 का हवाला देते हुए कहा गया है कि चुनावों के संचालन, निर्देशन और नियंत्रण की जिम्मेदारी ‘चुनाव आयोग’ को दी गई है, किसी एक पदाधिकारी को नहीं.

याचिका में 2023 के कानून की धारा 18 का भी उल्लेख किया गया है. इसके मुताबिक आयोग में आम सहमति नहीं बनने पर फैसले बहुमत के आधार पर लिए जाने का प्रावधान है.

दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का भी जिक्र

याचिका में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की लिखित टिप्पणियों और फाइल नोटिंग का हवाला दिया गया है. दावा किया गया है कि अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच दोनों आयुक्तों ने कम से कम 14 मामलों में आपत्ति दर्ज कराई.

इन आपत्तियों में बिना आयोग की मंजूरी आदेश जारी करने, बैठकों के एजेंडे और कार्यवाही से जुड़ी जानकारी साझा न करने, विदेश यात्राओं, फॉर्म-6 में बदलाव, वोटर डेटाबेस तक पहुंच और पश्चिम बंगाल में ट्रिब्यूनल के सामने अपील जैसे मुद्दे शामिल बताए गए हैं. याचिका में वोटर डेटा के केंद्रीकरण और चुनाव आयोग के आईटी विभाग में जिम्मेदारियों के बदलाव को लेकर जताई गई चिंताओं का भी उल्लेख है.


ये भी पढ़ें: चीनी निवेश ऐप धोखाधड़ी मामला: सुप्रीम कोर्ट ने भूपेश अरोड़ा और रोहित विज की जमानत रद्द की


आयोग का क्या कहना है?

चुनाव आयोग ने इन मतभेदों को संस्थागत टूट मानने से इनकार किया है. आयोग के मुताबिक बहुसदस्यीय संवैधानिक संस्था में अलग-अलग राय और लिखित आपत्तियां सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं. आयोग ने यह भी कहा है कि एसआईआर से जुड़े फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे.

अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में यह अहम सवाल सामने होगा कि अनुच्छेद 324 और संबंधित कानून के तहत चुनाव आयोग में निर्णय लेने की प्रक्रिया किस तरह संचालित होनी चाहिए.

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read


Kanya Sumangla Mission Shakti Digital