सुप्रीम कोर्ट ने फर्जी चीनी निवेश ऐप से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग (धन शोधन) के एक बड़े मामले में आरोपी भूपेश अरोड़ा और रोहित विज को दिल्ली हाईकोर्ट से मिली जमानत को रद्द कर दिया है. जस्टिस एम. एम. सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने सभी पक्षों की लंबी जिरह सुनने के बाद यह फैसला सुनाया.
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भूपेश अरोड़ा को 11 जुलाई 2025 को गिरफ्तार किया था. वह साइबर फ्रॉड की जांच से बचने के लिए वर्ष 2022 की शुरुआत में अपने साथियों के साथ दुबई भाग गया था. हालांकि, बाद में दिल्ली हाईकोर्ट ने फरवरी 2026 में उसे जमानत दे दी थी, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है.
सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण कानूनी टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में एक बेहद अहम व्यवस्था देते हुए स्पष्ट किया है कि “प्रेडिकेट ऑफेंस (मूल अपराध) में समझौता हो जाने से उससे जुड़ी आपराधिक गतिविधियां खत्म नहीं हो जाती हैं.”
कोर्ट ने कहा कि केवल मूल अपराध में पीड़ित/शिकायतकर्ता और आरोपी के बीच समझौता होने के आधार पर प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत चल रही जांच या कार्रवाई को स्वतः समाप्त नहीं माना जा सकता. यह फैसला पीएमएलए के उन मामलों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है, जहां मूल मामले में समझौता होने के बाद भी मनी लॉन्ड्रिंग की जांच जारी रहती है.
क्या है पूरा मामला और ‘LOXAM’ ऐप घोटाला?
311 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता: यह पूरा मामला “LOXAM” नामक एक ऑनलाइन निवेश ऐप से जुड़ा है, जिसमें लगभग 311 करोड़ रुपये की भारी-भरकम वित्तीय अनियमितताओं और धोखाधड़ी का आरोप है. प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में यह दावा किया गया है कि भूपेश अरोड़ा इस पूरे कथित नेटवर्क का मुख्य मास्टरमाइंड है. ईडी के अनुसार, ठगी गई इस अवैध रकम को शेल (फर्जी) कंपनियों और विदेशी मुद्रा कारोबार से जुड़े विभिन्न माध्यमों के जरिए भारत से बाहर भेजा गया था.
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ईडी ने इस मामले में Xindai Technologies Pvt. Ltd, भूपेश अरोड़ा, रोहित विज और अन्य के खिलाफ पीएमएलए के तहत मामला दर्ज किया था. इस मामले की जांच की शुरुआत 26 जुलाई 2022 को तब हुई थी, जब हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस ने पहली एफआईआर दर्ज की थी. चीनी और भारतीय सहयोगियों की मिलीभगत: जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस घोटाले में कुछ चीनी नागरिकों ने भारतीय सहयोगियों के साथ मिलकर ‘LOXAM’ नाम से फर्जी इन्वेस्टमेंट ऐप संचालित किया था, जिसके जरिए देश भर के निवेशकों के साथ करोड़ों की ठगी की गई.
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