बिहार विधान परिषद से निष्कासित आरजेडी नेता रामबली सिंह की ओर से दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 9 दिसंबर को सुनवाई करेगा. रामबली सिंह ने पटना हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. पटना हाई कोर्ट ने विधान परिषद के सभापति के द्वारा सदस्यता रद्द करने के निर्णय को वैध करार दिया था, इस फैसले को उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है.
हाई कोर्ट ने रामबली सिंह की याचिका खारिज करते हुए कहा था कि उन्होंने अपने आचरण से.स्वेच्छा से अपनी राजनीतिक पार्टी छोड़ दी है और इसलिए उन्हें अयोग्य ठहराया जा सकता है. कोर्ट ने कहा कि प्रत्येक नागरिक को बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मौलिक अधिकार हैं. लेकिन जब वह किसी राजनीतिक दल से विधान परिषद के सदस्य होते हैं तो अपने दल के अनुशासन, संविधान और नियमों का पालन करना चाहिए. रामबली सिंह पर पार्टी विरोधी क्रियाकलापों एवं अनुशासन भंग करने का आरोप था.
6 फरवरी को रद्द हुई थी सदस्यता
तत्कालीन सभापति देवेश चंद्र ठाकुर ने उन आरोपों को सही पाते हुए 6 फरवरी को विधान परिषद से उनकी सदस्यता समाप्त कर दी थी. सभापति के आदेशों के विरुद्ध उन्होंने हाई कोर्ट में दायर की थी. रामबली सिंह 29 जून 2020 को विधान परिषद के सदस्य चुने गए थे और उनका छह साल का कार्यकाल जून 2026 में खत्म होना था.
रामबली सिंह ने तेजस्वी यादव पर गंभीर आरोप लगाए थे, जिसके बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की गई थी.
ये भी पढ़ें: अरुंधति रॉय को बड़ी राहत, SC ने कहा- ‘किसी के विचार नापसंद होना मुकदमे का आधार नहीं, केरल हाई कोर्ट का फैसला बरकरार’
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.


