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पुलिस हिरासत में मौत पर सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख: 2 साल बाद FIR दर्ज होने पर जताई नाराजगी, CBI करेगी जांच

Chhattisgarh Custodial Death: सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ में हिरासत में हुई 34 वर्षीय व्यक्ति के मौत की सीबीआई जांच का आदेश दिया है. कोर्ट ने राज्य सरकार को याचिककर्ताओ को अंतरिम मुआवजे के तौर पर 25 लाख रुपए देने का भी निर्देश दिया है.

SUPREME-COURT
Edited by Shubhra Rai

Chhattisgarh Custodial Death: सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ में हिरासत में हुई 34 वर्षीय व्यक्ति के मौत की सीबीआई जांच का आदेश दिया है. कोर्ट ने राज्य सरकार को याचिककर्ताओ को अंतरिम मुआवजे के तौर पर 25 लाख रुपए देने का भी निर्देश दिया है.

दायर याचिका पर सुनवाई के बाद तय होगा

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मुआवजे की अंतिम राशि दायर याचिका पर सुनवाई के बाद तय किया जाएगा. जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने यह निर्देश दिया है. सीबीआई को कस्टडी में हुई मौत के मामले में रेगुलर क्रिमिनल केस दर्ज करने और जांच किसी सीनियर अधिकारी को सौंपने का निर्देश दिया. न्यायिक जांच में यह सामने आया है कि मृतक की मौत कस्टडी के दौरान सिर में लगी चोट से हुई थी.

सभी रिकॉर्ड एक सप्ताह के भीतर सौंपे

कोर्ट ने कहा कि न्यायिक जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद भी उचित कदम नहीं उठाया गया. सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के डीजीपी को निर्देश दिया है कि मामले से संबंधित सभी रिकॉर्ड एक सप्ताह के भीतर सीबीआई निदेशक को सौंपे. कोर्ट ने सीबीआई को जांच जल्द पूरी कर अगली सुनवाई से पहले रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है. कोर्ट 13 अक्टूबर को मामले में अगली सुनवाई करेगा.

पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के निर्देश पर मृतक के परिजनों को दिए गए एक लाख रुपये के मुआवजे को पर्याप्त नहीं माना था. अदालत ने कहा था कि हिरासत में मौत जैसे मामलों में केवल मुआवजा ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि जिम्मेदारी तय होना भी जरूरी है.

कच्ची महुआ शराब रखने के आरोप में गिरफ्तार

बता दें कि 18 जनवरी 2024 को सीपत पुलिस ने श्रवण सूर्यवंशी को आबकारी एक्ट के तहत 6 लीटर कच्ची महुआ शराब रखने के आरोप में गिरफ्तार किया था. गिरफ्तारी के बाद उसे बिलासपुर सेंट्रल जेल भेजा गया. 22 जनवरी को उसकी तबियत बिगड़ने के बाद उसे सिम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 22 जनवरी की सुबह ईलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर गौर किया कि मौत के दो साल बाद भी मामले में एफआईआर दर्ज नही किया गया. पुलिस ने 30 जुलाई 2026 को एफआईआर दर्ज किया था, जबकि श्रवण सूर्यवंशी की मौत 2024 में हुई थी.

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-भारत एक्सप्रेस



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