देश में ट्रिब्यूनल के कार्यप्रणाली पर सीजेआई सूर्यकांत ने असंतोष जाहिर किया है. सीजेआई सूर्यकांत ने खुलासा किया कि उन्हें जानकारी मिली है कि एक महत्वपूर्ण वित्तीय अधिकरण के तकनीकी सदस्य खुद फैसला नही लिख रहे है, बल्कि न्यायिक सदस्यों से अपने नाम से फैसला लिखवाने का आग्रह करते है.
सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने ट्रिब्यूनल सुधार अधिनियम 2021 को रद्द कर दिया है. वही अटॉर्नी जनरल ने जवाब दाखिल करने के लिए समय की मांग की है. सीजेआई ने अटॉर्नी जनरल से कहा कि ट्रिब्यूनल केंद्र सरकार की रचना है और अब वे आपके लिए सिर दर्द बन गए है और हमारे लिए बोझ है, क्योंकि उनके आदेशों की प्रकृति, उनका कार्य करने के तरीका और उनके खिलाफ आने वाली चुनौतियां हमें झेलनी पड़ती हैं.
कोर्ट ने कहा कि विधायी व्यवस्था के कारण हमने एक ऐसा क्षेत्र बना दिया, ये न तो न्यायपालिका के प्रति जवाबदेह है और न ही किसी और के प्रति. कोर्ट ने यह भी कहा कि ट्रिब्यूनल के तकनीकी सदस्य एक भी निर्णय नहीं लिख रहे है.
ट्रिब्यूनल का उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा- CJI सूर्यकांत
सीजेआई ने कहा कि मैं अत्यंत चिंतित हूं. हमने ट्रिब्यूनल बनाने के नाम पर कैसी अव्यवस्था खड़ी कर ली है, सिर्फ इसलिए कि हाई कोर्ट अपने संवैधानिक अधिकारों का प्रयोग न करें. सीजेआई ने कहा कि जिस उद्देश्य के लिए बनाया गया था, उस उद्देश्य को पूरा नही कर पा रहे है. सीजेआई सूर्यकांत ने ट्रिब्यूनल्स के तकनीकी सदस्यों की विशेषज्ञता और उनके चयन की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाया.
सीजेआई सूर्यकांत ने बिना पहचान उजागर किए एक ट्रिब्यूनल के एक तकनीकी सदस्य के आचरण पर आपत्ति जताते हुए कहा कि वह या तो पूरा फैसला न्यायिक सदस्य से या बाहर के लोगों से लिखवाते हैं, सही समय पर वह इस मामले में फैसला लेंगे.
ये भी पढ़ें: आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ी राहत
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.


