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3700 करोड़ का पोंजी स्कैम: CJI सूर्यकांत काRegistry पर फूटा गुस्सा, ED को तुरंत नोटिस जारी करने का आदेश

Supreme Court Case: सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने रजिस्ट्री की कार्यप्रणाली पर कड़ी फटकार लगाते हुए एक बार फिर अपनी नाराजगी जाहिर की है. नोएडा के बहुचर्चित 3700 करोड़ रुपये के पोंजी स्कैम मामले की सुनवाई के दौरान CJI ने रजिस्ट्री के रवैये को “बेहद खराब” करार दिया.

Supreme Court India
Edited by Shubhra Rai

CJI सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री की अनुशासनहीनता पर सवाल उठाते हुए नोएडा पोंजी स्कैम की आरोपी आयुषी मित्तल के मामले में ED को पक्षकार बनाने का आदेश दिया है. कोर्ट ने जमानत पर विचार करने से पहले पूरे परिवार और सहयोगियों की संपत्तियों का ब्योरा माँगा है, ताकि मामले की तह तक जाया जा सके.

सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री के कामकाज पर नाराजगी जताई

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री के कामकाज पर एक बार फिर नाराजगी जताई है. आयुषी मित्तल बनाम राजस्थान सरकार के मामले की सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री बहुत ही खराब तरीके से काम कर रही है. सीजेआई सूर्यकांत ने कहा बहुत ही खराब रजिस्ट्री है. यहां बैठा हर व्यक्ति खुद को भारत का सुपर चीफ जस्टिस समझता है.

ईडी को तुरंत नोटिस जारी किया जाए

सीजेआई ने रजिस्ट्रार जनरल ज्युडिशयल को निर्देश दिया कि मार्च 2026 के आदेश का सही विश्लेषण किया जाए और यह जांच हो कि उसे नोटिस जारी करने के रूप में क्यों नहीं माना गया. साथ ही उन्होंने कहा कि ईडी को तुरंत नोटिस जारी किया जाए. आयुषी मित्तल नोएडा के चर्चित 3700 करोड़ रुपए के पोंजी स्कैम मामले में मुख्य आरोपी अनुभव मित्तल की पत्नी है.

अदालत ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता का कानूनी प्रतिनिधि एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करें, जिसमें याचिकाकर्ता, उसके पति, बच्चों, माता-पिता, भाई-बहनों और ससुराल पक्ष की संपत्तियों का पूरा विवरण हो.

जमानत पर विचार किया जाएगा

इसके अलावे कंपनी के निदेशकों, प्रबंधकों और प्रमुख कर्मचारियों की संपत्तियों की जानकारी भी देने को कहा है. कोर्ट ने संकेत दिया गया संपत्तियों का ब्योरा मिलने के बाद ही जमानत पर विचार किया जाएगा. अनुभव मित्तल 2017 से ही जेल में है. मार्च में सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को एक पक्ष बनाने का निर्देश दिया था.

साथ ही अदालत ने आदेश दिया था कि ईडी के निदेशक को नोटिस जारी कर यह पता लगाया जाए कि याचिकाकर्ता उनके परिवार और करीबी रिश्तेदारों की संपत्तियां जब्त की गई हैं या नही.

ईडी ने फ्रीज कर रखा है

कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि जमानत पर विचार करने से पहले संपत्तियों का विवरण अनिवार्य है. इस मामले में राजस्थान सरकार भी शामिल है और उसके वकील के अनुरोध पर ईडी को नोटिस जारी किया गया था. मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष का कहना है कि निवेशकों का काफी पैसा लौटाया जा चुका है और कुछ राशि अभी भी बैंक खातों में हैं, जिसे ईडी ने फ्रीज कर रखा है.

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-भारत एक्सप्रेस 



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