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फ्रांस और भारत केवल साझेदार नहीं हैं, बल्कि आत्मीय सहयोगी हैं: सीजेआई सूर्यकांत

भारत-फ्रांस विधि एवं व्यापार सम्मेलन के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि आप सभी के बीच उपस्थित होना मेरे लिए गर्व और आनंद का विषय है. फ्रांस वह देश है जिसने हमेशा तर्क और विवेक की शक्ति में विश्वास किया है-जहां विचार संवाद और बहस की कसौटी पर और मजबूत होते है. उन्होंने कहा कि फ्रांस और भारत केवल समझदार नहीं हैं, बल्कि आत्मीय सहयोगी हैं.

CJI SURYAKANT

भारत-फ्रांस विधि एवं व्यापार सम्मेलन के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि आप सभी के बीच उपस्थित होना मेरे लिए गर्व और आनंद का विषय है. फ्रांस वह देश है जिसने हमेशा तर्क और विवेक की शक्ति में विश्वास किया है-जहां विचार संवाद और बहस की कसौटी पर और मजबूत होते है. उन्होंने कहा कि फ्रांस और भारत केवल समझदार नहीं हैं, बल्कि आत्मीय सहयोगी हैं.

लोकतांत्रिक परंपराओं, कानून और न्यायिक पर आधारित

सीजेआई ने कहा कि भारत और फ्रांस का संबंध साझा मूल्यों, लोकतांत्रिक परंपराओं, कानून के शासन और न्यायिक सहयोग पर आधारित है. उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच कानूनी और व्यावसायिक सहयोग वैश्विक चुनौतियों से निपटने में अहम भूमिका निभा सकता है. सीजेआई ने कहा कि भारत और फ्रांस का आपसी विश्वास और संस्थागत संवाद इस साझेदारी को केवल रणनीतिक नहीं, बल्कि मूल्य आधारित बनाता है, जो भविष्य में और अधिक सशक्त होगा. सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि न्याय वही संरक्षित करता है, जिसे हम भविष्य के लिए निर्मित करना चाहते हैं.

उन्होंने यह भी कहा कि भारत-फ्रांस का ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंध भारत और फ्रांस के संबंध केवल कूटनीति तक सीमित नहीं है. रक्षा, सुरक्षा, सतत विकास, उन्नत तकनीक और व्यापार हर क्षेत्र में दोनों देशों की की साझेदारी मजबूत होती जा रही है. सीजेआई ने कहा कि पिछले एक दशक में द्विपक्षीय व्यापार दोगुने से भी अधिक बढ़ा है- 2009-10 में 6.4 अरब डॉलर से बढ़कर हाल के वित्त वर्ष में 15.11 अरब डॉलर तक पहुंच गया है.

मध्यस्थता और न्यायपालिका की भूमिका स्पष्ट

भारत में फ्रांसीसी कंपनियों की उपस्थिति भी लगातार सशक्त हुई है. कुल विदेशी प्रत्यक्ष निवेश में फ्रांस की हिस्सेदारी 1.6 फीसदी से अधिक है, जो भारत की आर्थिक स्थिरता और दीर्घकालिक औद्योगिक भविष्य में विश्वास को दर्शाती है. सीजेआई ने कहा कि फ्रांस के महान दार्शनिक ब्लेज पास्कल के शब्द आज उतने ही प्रासंगिक हैं-” न्याय बिना शक्ति के निर्बल है, और शक्ति बिना न्याय के अत्याचारी” उन्होंने कहा कि आज केसमय मे शक्ति का अर्थ बदल चुका है. यह न तो केवल सैन्य बल है और न ही आर्थिक प्रभुत्व.

न्यूनतम न्यायिक हस्तक्षेप की नीति पर जोर

सीजेआई ने कहा कि मध्यस्थता और न्यायपालिका की भूमिका सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि मध्यस्थता की स्वयत्तता का सम्मान किया जाना चाहिए. लेकिन जब प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन हो, तो न्यायपालिका अपनी भूमिका से पीछे नहीं हट सकती. उन्होंने यह भी कहा कि अदालत ने न्यूनतम न्यायिक हस्तक्षेप की नीति अपनाई है, जहां पक्षपात, भ्रष्टाचार या गंभीर प्रक्रियात्मक गलतियों की स्थिति में घरेलू मध्यस्थता पुरस्कार रद्द किए जा सकते हैं. वही यदि कोई विदेशी पुरस्कार भारत की सार्वजनिक नीति के खिलाफ हो तो उसके प्रवर्तन से इनकार किया जा सकता है.

भारत-फ्रांस संबंध में साझेदारी

जबकि ,इससे पहले उन्होंने कहा था कि भारत फ्रांस साझेदारी कोई विलासिता नहीं, जीवनरेखा है. भारत-फ्रांस विधि एवं व्यापार सम्मेलन में सीजेआई ने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध लंबे समय से विशुद्ध रूप से राजनयिक सीमाओं से परे एक बहुआयामी संरचना पर आधारित रहे हैं, जिसमें मजबूत रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग से लेकर सतत विकास और उन्नत प्रौद्योगिकियो की साझा खोज तक सब कुछ शामिल है.

-भारत एक्सप्रेस
Edited by: Shubhra Rai (Intern)


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