हरियाणा से कांग्रेस विधायक मम्मन खान को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है. सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब हरियाणा हाई कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें केवल विधायक होने के आधार पर उनके खिलाफ 2023 के नूह हिंसा मामले में अलग ट्रायल चलाने का निर्देश दिया गया था.
जस्टिस जे. बी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन के बेंच ने यह फैसला दिया है.
जनप्रतिनिधियों से जुड़े मामलों का जल्द निपटारा
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि जनप्रतिनिधियों से जुड़े मामलों का शीध्र निपटारा जरूरी है, लेकिन यह उद्देश्य कानून में निहित प्रक्रियात्मक सुरक्षा और संविधान के समानता के सिद्धांत को ओवरराइड करके पूरा नहीं किया जा सकता.
कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा है कि अलग ट्रायल का आधार विधायक होना नहीं हो सकता है. कोर्ट ने कहा कि सभी आरोपी कानून के सामने समान हैं. किसी को राजनीतिक पद के कारण अलग ट्रायल देना संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता) के खिलाफ है.
गवाहों को बार-बार बुलाने पर होगी देरी
कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा है कि अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता) के तहत शीघ्र ट्रायल का अधिकार महत्वपूर्ण है, लेकिन इसे निष्पक्षता की कीमत पर हासिल नही किया जा सकता है. कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि अलग ट्रायल से गवाहों को बार-बार बुलाना पड़ेगा, जिससे मुकदमें में देरी होगी और विरोधाभासी फैसले की आशंका बनी रहेगी.
कांग्रेस विधायक पर हिंसा भड़काने का आरोप
अगस्त 2023 में हरियाणा के नूह में हुई साम्प्रदायिक हिंसा में छह लोगों की मौत हो गई थी. इस मामले में मम्मन खान सहित कई लोगों पर हिंसा भड़काने का आरोप लगा. निचली अदालत के खान के खिलाफ आदेश दिया. जिसके खिलाफ खान ने पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट में अपील दायर की, लेकिन हाई कोर्ट ने मम्मन खान की अपील को खारिज करते हुए निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा.
इसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट ने पहुचा और सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश दिया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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