अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट में PIL दायर कर चुनावी वादों के वित्तीय प्रभाव, मुफ्त की रेवड़ियों पर रोक और घोषणापत्रों के लिए एक निश्चित प्रारूप लागू करने की मांग की है. (PC: भारत एक्सप्रेस)
Delhi Bar Council Election: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली बार काउंसिल चुनाव के मतगणना को लेकर स्टेट्स रिपोर्टर दाखिल करने की अनुमति दे दी है. सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने 4 अगस्त को याचिका का निपटारा कर दिया था.
क्या है मामाला?
दिल्ली बार काउंसिल ने सीजेआई सूर्यकांत के समक्ष मेंशनिंग कर बताया कि वोटों की गिनती पूरी हो गई है, लेकिन नतीजे अभी घोषित नहीं किया गया है. लिहाजा स्टेट्स रिपोर्ट दाखिल करने की अनुमति दी जाए. जिसपर कोर्ट ने अंतिम स्टेट्स रिपोर्ट दाखिल करने की अनुमति दे दी. दिल्ली बार काउंसिल ने कोर्ट को बताया कि इस मामले का 4 अगस्त को निपटारा कर दिया गया था. इसपर कोर्ट ने पूछा कि क्या यह दिल्ली बार काउंसिल का वही मामला है, जो हमारे सामने आ रहा है? वकील ने बताया कि यह अलग मामला है, जिसमें स्टेट बार काउंसिल चुनावों के संबंध में दिशा निर्देश जारी किया गया था.
दैनिक आधार पर सुनवाई करने का निर्देश
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने मतगरण पर रोक लगा दिया था. साथ ही दिल्ली हाई कोर्ट को दायर याचिकाओं पर दैनिक आधार पर सुनवाई करने का निर्देश दिया था. यह याचिका बीरेंद्र सांगवान सहित अन्य की ओर से दायर किया गया था. कोर्ट ने कहा था कानूनी पक्षकारों के वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने इस बात पर सहमति व्यक्त की है कि विवाद के प्रभावी निपटारे के लिए मतपत्र आदि जैसे मूल रिकॉर्ड को मंगवाना आवश्यक हो सकता है, इसलिए मामले को हाई कोर्ट के खंडपीठ को सौंपना उचित होगा.
कोर्ट ने आदेश दिया था कि,
हम इन याचिकाओं को दिल्ली हाई कोर्ट को हस्तांतरित करते हैं और मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध करते हैं और मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध करते हैं कि वह इस सप्ताह के भीतर इन्हें एक विशेष पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करें. कोर्ट ने कहा था कि जब तक हाई कोर्ट फैसला नहीं सुनाता, तब तक मतपत्रों की गिनती स्थगित रखी जाएगी.
इससे पहले राज्य बार काउंसिल चुनावों से जुड़े विवादों के निपटारे के लिए पूर्व न्यायाधीश जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस हिमा कोहकी की अध्यक्षता में दो चुनाव न्यायाधिकरण गठित करने का आदेश दिया है. यह आदेश विभिन्न राज्यों में बार चुनावों के संचालन से संबंधित मुकदमों में हुई वृद्धि से निपटने के लिए पारित किया गया है.
-भारत एक्सप्रेस
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