दिल्ली हाई कोर्ट ने कैश कांड मामले में घिरे इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस यशवंत वर्मा के मामले की सीबीआई या एसआईटी जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है. यह याचिका अधिवक्ता घनश्याम उपाध्याय की ओर से दायर किया गया था.
जस्टिस अमित बंसल ने याचिका को खारिज करते हुए टिप्पणी की कि ” मैं इसे सुनने नहीं जा रहा हूं, यह एक वाइल्ड विच हंट है. आपके पास करने के लिए इससे बेहतर कोई काम नहीं है?” मामले की सुनवाई के दौरान संबंधित अधिकारियों ने याचिकाकर्ता के अधिकार को लेकर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता के पास अन्य वैकल्पिक कानूनी उपाय मौजूद हैं.
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने यशवंत वर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया था. कोर्ट ने कहा था कि इस तरह की याचिका सस्ती पब्लिसिटी के लिए दाखिल की जाती है. याचिकाकर्ता की दलील थी कि अगर घटना में संज्ञेय अपराध की आशंका है तो केवल इन-हाउस जांच पर्याप्त नहीं हो सकती.
सुप्रीम कोर्ट द्वारा तीन सदस्यीय कमेटी का गठन
ऐसे मामले में एफआईआर दर्ज कर आपराधिक जांच शुरू की जानी चाहिए. दायर याचिका में कहा गया था कि 14 मार्च 2025 को दिल्ली स्थित जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी आवास पर आग लगने के बाद वहां बड़ी मात्रा में जली और आधी जली नकदी मिलने की खबरें सामने आई थी. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया था, जिसमें जस्टिस शील नागू शामिल थे. याचिकाकर्ता का कहना था कि इन-हाउस जांच अनुशासनात्मक प्रक्रिया हो सकती है, लेकिन वह आपराधिक जांच का विकल्प नहीं है.
याचिकाकर्ता के अनुसार 2 जून 2026 को सीबीआई, दिल्ली पुलिस और प्रवर्तन निदेशालय को शिकायत देकर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, मनी लॉन्ड्रिंग कानून, भारतीय न्याय संहिता और अन्य संबंधित कानूनों के तहत एफआईआर दर्ज नही हुई. जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया था.
महाभियोग प्रस्ताव की शुरुआत और मंजूरी
जस्टिस वर्मा के दिल्ली स्थित सरकारी आवास से भारी मात्रा में अधजली नोट मिलने के बाद 14 मार्च 2025 को महाभियोग की कार्यवाही शुरू की गई थी. अगस्त 2025 में, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 146 सांसदों के हस्ताक्षर के साथ महाभियोग प्रस्ताव को मंजूरी दी थी और 3 सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया था.
जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव 21 जुलाई को लाया गया था और उसी दिन राज्यसभा के चेयरमैन ने इस्तीफा दे दिया था. जिसके बाद 11 अगस्त को डिप्टी चेयरमैन ने प्रस्ताव को खारिज कर दिया और 12 अगस्त को लोकसभा अध्यक्ष ने जांच कमेटी बनाने की मंजूरी दे दी.
जस्टिस वर्मा का कहना था कि उनके मामले में जजेज इन्क्वायरी एक्ट 1968 में तय प्रक्रिया का पालन नही किया गया है. लोकसभा के सदस्यों से मिलने के आधार पर अध्यक्ष ओम बिरला ने12 अगस्त 2025 को जांच कमेटी का गठन किया था.
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-भारत एक्सप्रेस
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