दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय परिसर में शांतिपूर्ण तरीके से इकठ्ठा होने पर पूरी तरह रोक लगाने के डीयू के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर दिल्ली विश्वविद्यालय को जवाब दाखिल करने के लिए 2 सप्ताह का समय दे दिया है. मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने टिप्पणी करते हुए कहा आर्टिकल 19 के तहत बोलने की आजादी पर कुछ पाबंदियां भी है. आजकल क्या हो रहा है, यह सभी जानते है. अगर आप यह साबित कर दें कि इकठ्ठा होने का मतलब एकेडमिक है और आप नए और जाने वाले छात्रों के लिए स्वागत समारोह आयोजित कर रहे है और वे इसे रोकते है तो आप इसे चुनौती दे सकते हैं.
हाई कोर्ट ने कहा कि यह रोक लगाने जैसा नही है, बल्कि इसके लिए सिर्फ इजाजत लेने की जरूरत है. मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की पीठ 20 अगस्त को मामले में अगली सुनवाई करेगा. दायर याचिका में कहा गया है कि डीयू के फरवरी और मार्च के आदेश संविधान के अनुच्छेद 19, 14 और 21 का उल्लंघन करते हैं. इसके तहत छात्रों, शिक्षकों और स्टाफ सदस्यों को डीयू कैंपस के अंदर किसी भी तरह की गतिविधि करने से कम से कम 72 घंटे पहले डीयू अधिकारियों और पुलिस अधिकारियों से अनुमति लेनी होगी.
छात्रों, फैकल्टी और स्टाफ पर लागू प्रतिबंध पर विवाद
दिल्ली विश्वविद्यालय के विधि के छात्र उदय भदौरिया ने दायर की है. दायर याचिका में दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा परिसर में एक महीने के लिए सभी प्रकार के विरोध प्रदर्शनों पर प्रतिबंध लगाने के फैसले को चुनौती दी है. दायर याचिका में 17 फरवरी 2026 को प्रॉक्टर कार्यालय द्वारा जारी अधिसूचना को भी चुनौती दी गई है.
विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर प्रोफेसर मनोज कुमार द्वारा जारी आदेश में विद्यार्थियों, फैकल्टी और स्टाफ को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि प्रतिबंध अवधि में किसी भी प्रकार का सार्वजनिक आयोजन अनुमति के बिना नहीं किया जाएगा. भदौरिया ने किरोड़ी मल कॉलेज और दयाल सिंह कॉलेज द्वारा जारी आदेश को भी चुनौती दी है.जिनमें प्रतिबंध को और सख्ती से लागू किया गया.
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भारत एक्सप्रेस
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