दिल्ली हाईकोर्ट (प्रतीकात्मक फोटो)
Minor Assault Case: दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि नाबालिग लड़की की मेडिकल रिपोर्ट में चोटों का जिक्र नहीं होने के आधार पर उसपर हुए हमले को लेकर उसके बयान को खारिज नहीं किया जा सकता है. जस्टिस गिरीश कठपालिया ने टिप्पणी करते हुए सत्र अदालत को एक व्यक्ति व उसकी पत्नी के खिलाफ हमले तथा गलत तरीके से बंधक बनाने के आरोप पर नए सिरे से विचार करने का निर्देश दिया.
यह मामला आरोपी की कंपनी में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करने वाली पीड़िता ने वर्ष 2016 में दर्ज कराया था. सत्र अदालत ने व्यक्ति के खिलाफ बलात्कार व अप्राकृतिक यौन संबंध का आरोप तय किया था, लेकिन उसे व उसकी उसकी पत्नी को मारपीट तथा गलत तरीके से बंधक बनाने के आरोपों से बरी कर दिया था.
पुलिस ने उसे हाईकोर्ट में चुनौती दी थी और उसको लेकर अपील दाखिल किया था. सत्र अदालत ने कहा था कि लड़की के एमएलसी में किसी चोट का उल्लेख नहीं है, इसलिए आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 323 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाने) के तहत आरोप तय नहीं किया जा सकता है.
इकबालिया बयान में लड़की ने आरोप लगाया था कि उसके पेट पर लात मारी गई और उसका सिर दीवार पर मारा गया, लेकिन एमएलसी में कोई चोट नहीं दिखाई गई और इससे आईपीसी की धारा 323 के तहत आरोप लगाने का कोई मामला नहीं बनता है.
-भारत एक्सप्रेस
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