Bharat Express DD Free Dish
Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital
Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital

दिल्ली हाई कोर्ट ने केजरीवाल, सिसोदिया और अन्य AAP नेताओं को जारी किया क्रिमिनल अवमानना नोटिस

दिल्ली शराब नीति मामले में हाई कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल समेत आम आदमी पार्टी के बड़े नेताओं को क्रिमिनल अवमानना का नोटिस थमा दिया है. जज की एक सख्त टिप्पणी ने स्पष्ट कर दिया है कि अब यह मामला किस अहम मोड़ पर पहुंचने वाला है.

Delhi High Court hearing

फाइल फोटो

दिल्ली शराब नीति मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के खिलाफ कथित तौर पर “बदनाम करने वाली और बदनाम करने वाली” टिप्पणियों के लिए अरविंद केजरीवाल, संजय सिंह, मनीष सिसोदिया, सौरभ भारद्वाज और अन्य को कोर्ट की अवमानना का क्रिमिनल नोटिस जारी किया है. जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर डुडेजा की बेंच ने यह नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है. कोर्ट ने कहा कि वह इस मामले में एमिकस क्यूरी नियुक्त करेगा. मामले की अगली सुनवाई 4 अगस्त को होगी.

जज ने खुद को केस से किया अलग

जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने अवमानना की कार्रवाई करने का आदेश जारी करते हुए दोनों मामलों से अपने आप को अलग कर लिया था. केजरीवाल सहित अन्य ने स्वर्णकांता शर्मा को पत्र लिखकर केस से हटने की मांग की थी. जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के खिलाफ सोशल मीडिया पर आरोप लगाने के चलते अवमानना की कार्रवाई शुरू करने को कहा था.

“सुविधा नहीं बल्कि साहस चुनना होता है”

जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि एक जज सत्ता के सामने झुक नहीं सकता. उन्होंने कहा था कि जब संस्था दांव पर हो, तब अदालत को सुविधा नहीं बल्कि साहस चुनना होता है. यह अदालत सुविधा के बजाय साहस का रास्ता चुनेगी. हाईकोर्ट ने कहा था कि अवमानना करने वालों ने गलतफहमी पाल ली है कि उनके बयानों और सामग्री को “जनमत” का रूप देकर बचाया जा सकता है.

न्यायिक संस्था की रक्षा और झूठे बयान

कोर्ट ने कहा था कि अवमानना कानून सिर्फ किसी व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरी न्यायिक संस्था की रक्षा करता है. हाईकोर्ट ने कहा था कि एक जज सत्ता के सामने झुक नहीं सकता. जब संस्था दांव पर हो, तब अदालत को सुविधा नहीं बल्कि साहस चुनना होता है. यह अदालत सुविधा के बजाय साहस का रास्ता चुनेगी.

ये भी पढ़ें: आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: राज्यों को दिया बड़ा आदेश, जानिए क्या हैं SC के निर्देश?

कोर्ट ने कहा था कि आरोपियों ने अदालत और जज की छवि खराब करने की कोशिश की और आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट की. हाईकोर्ट ने कहा कि “जब मैंने एक राजनीतिक नेता के खिलाफ फैसला दिया, तो उन्हें वह पसंद नहीं आया. अगर असहमति थी तो उन्हें सुप्रीम कोर्ट जाना चाहिए था. लेकिन उन्होंने वीडियो बनाकर झूठे बयान दिए.



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read


Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital