दिल्ली हाईकोर्ट ने तिहाड़ जेल में अत्यधिक भीड़ होने के मुद्दे को उजागर करने वाली एक जनिहत याचिका को खारिज कर दिया है. मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय एवं न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता ने केंद्र सरकार के समक्ष एक प्रतिवेदन दिया था. जबकि वह मुद्दे का समाधान करने वाला संबंधित प्राधिकारी नहीं है.
तिहाड़ जेल के मामले को दिल्ली सरकार देखती है. इसलिए वह उसके समक्ष अपना मुद्दा उठाए. कोर्ट ने कहा कि दिल्ली के जेलों के मामलों को दिल्ली सरकार देखती है. इस दशा में याचिकाकर्ता आनंद मिश्रा दिल्ली सरकार या तिहाड़ जेल प्रशासन के लिए जिम्मेदार किसी अन्य प्राधिकारी से संपर्क करें. उसने पहले यह भी कहा था कि देश के जेलों में अत्यधिक कैदी होने का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लंबित है. इसपर याचिकाकर्ता के वकील ने एक अन्य मुद्दे को उठाते हुए कहा कि बिना कोई जांच के किसी भी व्यक्ति को तिहाड़ जेल के गेट में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए.
पीठ ने कहा कि केंद्रीय जेल का क्या मतलब है? केंद्रीय जेल का मतलब यह नहीं है कि यह केंद्र सरकार से प्रशासित है. आपको अपनी शिकायतें डीजी जेल, राज्य सरकार के प्रमुख सचिव गृह को अवगत कराना होगा. उन्हें यह बताना होगा कि यह वह नियम है जिसका आपने पालन नहीं किया. कृपया इसका पालन करें. अगर इसका निवारण नहीं होता है तो फिर अदालत आएं. हम निर्देश पारित करेंगे.
वकील ने इसके बाद संबंधित अधिकारियों को अपना प्रतिवेदन देने की बात कहते हुए अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी. कोर्ट ने उसे स्वीकार कर लिया और उसका निपटारा कर दिया.
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