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5 आरोपियों की जमानत का दिया हवाला, UAPA के तहत आरोपी अथर खान ने खटखटाया दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा

दिल्ली हाई कोर्ट 26 मई को 2020 दिल्ली दंगा मामले में आरोपी अथर खान की जमानत याचिका पर सुनवाई करेगा. दिल्ली पुलिस ने इस याचिका का विरोध करते हुए दंगों की भयावहता का हवाला दिया है.

Delhi High Court

दिल्ली हाई कोर्ट दिल्ली 2020 दंगों से जुड़े मामले में आरोपी अथर खान की ओर से दायर जमानत याचिका पर 26 मई को सुनवाई करेगा. जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और जस्टिस मधु जैन की पीठ दायर जमानत याचिका पर सुनवाई करेगी. अथर खान ने दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील दायर की है. मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने अथर खान सहित अन्य की ओर से दायर जमानत याचिका का विरोध किया है.

आरोपियों ने इसी मामले में सुप्रीम कोर्ट से 5 आरोपियों को मिली जमानत के आधार पर जमानत की मांग की थी. लेकिन कोर्ट ने उनकी इन दलीलों को खारिज कर दिया था. तीनों पर गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत आरोप लगाए गए हैं.

5 को मिल चुकी है जमानत

ताहिर हुसैन दिल्ली दंगों के आरोप में 4 साल 9 महीने से जेल में बंद हैं. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने शरजील इमाम और उमर खालिद को छोड़कर गुलफिशा फातिमा सहित पांच आरोपियों को जमानत दे दी थी. उमर खालिद, शरजील इमाम, गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद पर यूएपीए और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत फरवरी 2020 के दिल्ली दंगों का मास्टरमाइंड होने का आरोप है.

सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणियां

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जमानत बचाव पक्ष के मूल्यांकन का मंच नहीं है. न्यायिक संयम कर्तव्य का परित्याग नहीं है. उचित प्रयोग के लिए न्यायालय को एक व्यवस्थित जांच करनी होगी. क्या जांच से प्रथम दृष्टया अपराध सिद्ध होते हैं? क्या आरोपी की भूमिका का अपराध घटित करने से कोई उचित संबंध है? कोर्ट ने कहा था कि हाई कोर्ट ने जमानत की मांग को ठुकराया है. कोर्ट ने कहा था इस प्रक्रिया से साजिश के अभियोजन पक्ष का मामला कमजोर नहीं होता है. कोर्ट ने कहा था उमर खालिद और शरजील इमाम अन्य आरोपियों की तुलना में गुणात्मक रूप से भिन्न स्थिति में हैं.

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पेट्रोल बम और तेजाब का हुआ था इस्तेमाल

मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कोर्ट को बताया था कि इस दंगे में 53 लोग मारे गए और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे. साथ ही जमकर हिंसा हुई थी. एएसजी एसवी राजू ने कोर्ट को यह भी बताया था कि हिंसा के दौरान पेट्रोल बम का इस्तेमाल किया गया था, साथ ही जमकर पत्थरबाजी हुई थी. इतना ही नहीं तेजाब जैसे रसायनों का इस्तेमाल किया गया था. पुलिसकर्मियों पर भी हमला किया गया था. दिल्ली पुलिस ने यह भी कहा था कि 16 सितंबर की चार्जशीट पर 7 सितंबर 2020 को संज्ञान लिया गया था.



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