दिल्ली हाई कोर्ट ने स्वीडन में रहने वाले भारतीय मूल के प्रोफेसर अशोक स्वैन की ओर से दायर याचिका पर नोटिस जारी कर जवाब मांगा हैं. जस्टिस सचिन दत्ता ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है. अशोक स्वैन ने ओसीआई कार्ड बहाली के बावजूद भारत में प्रवेश पर लगी रोक के खिलाफ याचिका दायर की हैं. कोर्ट 18 दिसंबर को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा. अशोक स्वैन द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि ओसीआई कार्ड रद्द करने के सरकार के फैसले को खारिज होने के बावजूद भारत में प्रवेश पर कथित रूप से रोक लगा दी गई हैं.
28 मार्च 2025 को दिल्ली हाई कोर्ट ने अशोक स्वैन का ओवरसीज सिटिजनशिप ऑफ इंडिया कार्ड रद्द करने के केंद्र सरकार के आदेश को निरस्त कर दिया था. स्वैन ने पिछली सुनवाई में कहा था कि सरकार की नीतियों की आलोचना करना नागरिकता कानून के तहत भारत विरोधी गतिविधि के तहत नहीं आता है. इसपर हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा था कि ये कैसा आदेश है. आदेश पारित करते समय दिमाग का इस्तेमाल नही किया गया.
अदालत में न्याय की तलाश
स्वीडन और लातविया में भारतीय दूतावास ने 8 फरवरी 2022 को एक आदेश जारी कर अशोक स्वैन का ओसीआई दर्जा को रद्द कर दिया था. जिसके बाद स्वीडन की उप्पसाला विश्विद्यालय में शांति और संघर्ष अनुसंधान विभाग के प्रमुख अशोक स्वैन ने दिल्ली हाई कोर्ट से ओसीआई कार्ड बहाली की मांग की थी.
भारतीय दूतावास ने जारी अपने आदेश में कहा था कि नागरिकता अधिनियम की धारा 7 (डी) (ई) के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए ओसीआई दर्जा इस आधार पर रद्द किया जा रहा है कि याचिकाकर्ता ऐसी गतिविधियों में लिप्त है, जो भारत की संप्रभुता और अखंडता, सुरक्षा और किसी भी अन्य देश के साथ भारत के मैत्रीपूर्ण संबंधों के हित के लिए हानिकारक हैं.
-भारत एक्सप्रेस
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