पोर्न को बढ़ावा देने वाले एप को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है. कोर्ट ने कहा कि देश की पूरी पीढ़ी को बर्बाद होने की इजाजत नही दे सकती. कोर्ट ने चिंता जताते हुए कहा है कि ‘फ्रीडम ऑफ स्पीच’ के नाम पर देश की पूरी युवा पीढ़ी को बर्बाद होने की छूट नहीं दी जा सकती.
हाई कोर्ट ने गूगल, एप्पल और केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि पोर्नग्राफी और वेश्यावृत्ति को बढ़ावा देने वाले एप्स को रोकने को लेकर कार्रवाई को लेकर एक एक्शन टेकन रिपोर्ट दाखिल करें. कोर्ट ने कहा कि गूगल और एप्पल अपने प्ले स्टोर और एप स्टोर पर ऐसे कंटेंट को रोकने की जिम्मेदारी उठानी होगी.
डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सख्त निगरानी और कार्रवाई की मांग
यह याचिका रुबिका थापा ने दायर किया है. जिसमें दावा किया गया है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कई एप्लिकेशन कथित तौर पर अश्लील, भद्दी और पोर्नग्राफिक सामग्री को बढ़ावा दे रहे हैं. दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि इनमें से कुछ एप्लिकेशन का इस्तेमाल कथित अनैतिक तस्करी, वेश्यावृत्ति, नशीले पदार्थो के दुरुपयोग, हथियारों के अवैध व्यापार और संगठित आपराधिक गतिविधियों, जिसमें जबरन वसूली भी शामिल है, के लिए किया जा रहा है.
याचिकाकर्ता के मुताबिक कई एप्लिकेशन कथित तौर पर सोशल नेटवर्किंग और लाइव स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म की आड़ में काम कर रहे हैं, जबकि वे सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 और भारतीय न्याय संहिता 2023 के प्रावधानों का कथित उल्लंघन करते हुए अश्लील सामग्री प्रदर्शित कर रहे हैं.
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि इनमें से कई संस्थाए भारत के बाहर स्थित हैं और कथित तौर पर अमेरिका, तुर्की, जापान, रूस और चीन जैसे देशों में स्थित सर्वरों के जरिए काम करती है, जिससे भारतीय कानूनों को लागू करना मुश्किल हो जाता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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