दिल्ली हाईकोर्ट ने वसंत विहार इलाके में तीन राजनीतिक दलों को उनके पार्टी कार्यालयों के निर्माण के लिए 2.0524 एकड़ भूमि के आवंटन में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया. उक्त भूमि पहले भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) को आवंटित किया गया था, लेकिन बाद में केंद्र सरकार ने वर्ष 2002 में इसे रद्द कर दिया था. जस्टिस प्रतिबा मनिंदर सिंह एवं जस्टिस रजनीश कुमार गुप्ता की पीठ ने कहा कि यह भूमि पहले ही राजनीतिक दल समाजवादी पार्टी, जनता दल यूनाइटेड और मिजो पीस फाउंडेशन को आवंटित की जा चुकी है, उन पार्टियों ने निर्माण भी कर लिया है.
इसलिए इसे वापस नहीं लाया जा सकता है. ऐसी स्थिति में उक्त भूमि का पुन: आवंटन संभव नहीं है. पीठ ने यह बात एएआई की अपील पर सुनवाई करते हुए कहा है. यह भूमि एएआई को आवासीय परिसर के रूप में अपने अधिकारियों के लिए 120 आवास इकाइयां बनाने के लिए आवंटित की गई थी. इसके निर्माण की शुरु आत से पहले ही केंद्र ने आवंटन रद्द कर दिया था.
लंबित विवाद हो सकता है हल
एएआई ने कहा था कि उसे आवंटन रद्द करने का कोई कारण नहीं बताया गया. कोर्ट ने कहा कि एएआई को वैकल्पिक भूमि का आवंटन एक उचित व व्यवहार्य प्रस्ताव है. उसने केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय के सचिव, केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय के सचिव और एएआई के अध्यक्ष के बीच 15 अप्रैल को या उससे पहले उच्च स्तरीय बैठक करने को कहा है.
साथ ही कहा कि अगर वैकल्पिक भूमि का प्रस्ताव व्यवहारिक नहीं है तो एनबीसीसी द्वारा निर्मिंत फ्लैटों को एएआई की आवश्यकता के अनुसार आवंटित किया जा सकता है. जब एएआई निर्माण, रखरखाव आदि की लागत का रियायती दर पर शुल्क अदा करे. इससे एएआई के कर्मचारियों के हित में, दो सरकारी विभागों के बीच लंबे समय से लंबित इस विवाद का भी हल कर सकता है. कोर्ट 1 मई को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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