दिल्ली हाई कोर्ट ने प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) द्वारा दायर याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है. दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की पीठ ने सभी पक्षों की जिरह के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है.
मेंटलएबिलिटी पर आदेश सुरक्षित
मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि हम याचिका की मेंटलएबिलिटी पर आदेश सुरक्षित रख रहे है. मामले की सुनवाई के दौरान पीएफआई कि ओर से पेश वकील ने कहा कि हर न्यायाधिकरण न्यायिक कार्य करता है कुछ के पास सिविल कोर्ट की शक्तियां होती है.
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि न्यायाधिकरण का निर्णय न्यायिक प्रकृति का होता है और जब यूएपीए न्यायाधिकरण का नेतृत्व हाई कोर्ट के वर्तमान न्यायाधीश कर रहे हों, तो क्या हाई कोर्ट को पर्यवेक्षी क्षेत्राधिकारी प्राप्त हो सकता है.
पीएफआई पर लगा था पांच साल का प्रतिबंध
पीएफआई की ओर से पेश वकील ने यह भी कहा कि वह ट्रिब्यूनल के जज हैं, इस कोर्ट के जज नहीं. इसलिए यह मामला हाई कोर्ट के अधीन है. वही जस्टिस गेडेला ने कहा कि आपको यह समझना होगा कि शक्ति का दायरा क्या है. कानून क्या वर्णन करता है.
पीएफआई ने दायर याचिका में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) न्यायाधिकरण द्वारा पीएफआई को गैर कानूनी संगठन घोषित करने के आदेश को चुनौती दी गई है. सरकार ने 28 सितंबर 2022 को कड़े आतंकवाद विरोधी कानून, गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत पीएफआई और उसके कई सहयोगी संगठनों पर पांच साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया था, उनपर आईएसआईएस जैसे वैश्विक आतंकवादी समूहों के साथ संबंध रखने का आरोप लगाया था.
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-भारत एक्सप्रेस
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