अपहरण के मामले में कथित आरोपी सीआरपीएफ जवान की गिरफ्तारी पर दिल्ली हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है. मामले की सुनवाई के दौरान सीआरपीएफ जवान की ओर से पेश वकील ने जांच में सहयोग और शामिल होने का आश्वासन दिया. जिसके बाद कोर्ट ने गिरफ्तार न करने को कहा.
जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की बेंच ने यह आदेश दिया है. कोर्ट ने सीआरपीएफ जवाब भबानी चिब को जांच अधिकारी के सामने पेश होने का आदेश दिया था. जिसके बाद जवान 24 जून को जांच अधिकारी के समक्ष पेश हुआ था. पीड़िता की पत्नी की शिकायत पर साकेत थाने में आरोपी जवाब के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई हों. कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी साफ कर दिया है कि जब-जब जांच अधिकारी जांच में शामिल होने के लिए बुलाएगा, तब-तब शामिल होना होगा.
कोर्ट ने अगली सुनवाई से दो दिन पहले स्टेट्स रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है. कोर्ट 3 जुलाई को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा. आरोपी जवान 3 जून से ही फरार है. मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को बताया कि अपहृत व्यक्ति और सीआरपीएफ जवान दोनों दोस्त थे. करीब डेढ़ साल से एक दूसरे को जानते है. वह चार जून को स्वेच्छा से याचिकाकर्ता के साथ कश्मीर गया था.
सात जून को पीड़ित ने खुद कठुआ, जम्मू कश्मीर में जांच अधिकारी के समक्ष लिखित रूप से स्पष्ट रूप से कहा गया था कि याचिकाकर्ता ने उसका अपहरण नहीं किया है. ना ही फिरौती की कोई मांग की गई है. यह गलतफहमी है कि सीआरपीएफ जवान ने अपहरण किया है.
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